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गलत तरीके से किया गया राजस्व रिकॉर्ड दुरुस्त

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बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण के दौरान राजस्व रिकॉर्ड में सभी नियमों को ताक पर रख कर दुरुस्ती की गई है। जबकि राजस्व रिकॉर्ड में किसी भी प्रकार की दुरुस्ती का अधिकार भूमि अधिग्रहण की विशेष इकाई के तहसीलदार को नहीं था। यह अधिकार केवल भू राजस्व अधिनियम 1954 की धारा-16 में दर्ज राजस्व अधिकारियों को ही दुरुस्ती करने की शक्तियां प्रदान हैं। इसके लिए पहले अधिग्रहण की गई भूमि को पहले डी-नोटिफाइड किया जाएगा जिसके बाद रिकॉर्ड दुरुस्ती हो सकता है लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं हुआ है। इस पूरे मामले का खुलासा जन सूचना अधिकारी एवं जिला राजस्व अधिकारी देवी राम द्वारा राज्य सूचना आयुक्त हिमाचल प्रदेश को भेजी गई जानकारी से हुआ है।
उल्लेखनीय है कि कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण के दौरान कई बार राजस्व रिकॉर्ड को दुरुस्त किया गया। वहीं 21-12-2016 एजेंडा फॉर मीटिंग में भी तत्कालीन उपायुक्त ऋग्वेद ठाकुर ने इसकी पुष्टि की थी। उन्होंने आदेश भी दिए थे कि पूरे के पूरे रिकॉर्ड को नियम अनुसार दुरुस्त किया जाए क्योंकि रिकॉर्ड में कई अनियमितताएं हैं लेकिन उसके बाद भी एनएचएआई के तहसीलदार ने इस संबंध में नियम अनुसार कोई कार्रवाई नहीं की।
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जबकि अपने स्तर पर कई स्थान पर राजस्व रिकॉर्ड दुरुस्त कर डाला। नियम अनुसार रिकॉर्ड दुरुस्त न होने के कारण सालों से विस्थापितों और प्रभावितों को यह पता नहीं लग पा रहा है कि उनकी जमीन कहां शेष बची है और किस जमीन का अधिग्रहण हुआ है। इस कारण लोग लगातार सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
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विस्थापितों में सीता राम, महेंद्र सिंह, रणजीत सिंह, बाबू राम, बलदेव, वनबारी लाल, बृज लाल, देवेंद्र कुमार, देस राम, देव राज, देवी राम और फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के महा सचिव मदन लाल शर्मा ने बताया कि रिकॉर्ड नियम अनुसार दुरुस्त न होने से लोगों को अपनी जमीन तक की सही जानकारी नहीं मिल पा रही है। जनसूचना अधिकारी एवं जिला राजस्व अधिकारी देवी राम ने बताया कि राज्य सूचना आयुक्त हिमाचल प्रदेश को उक्त पूरी जानकारी भेज दी गई है।
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