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उपायुक्त कार्यालय के आदेश नहीं पहुंचे एसडीएम कार्यालय

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अमर उजाला ब्यूरो
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बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन कंपनी की ओर से गोबिंदसागर में की गई अवैध डंपिंग का मछुआरों की आजीविका व मछलियों पर क्या असर पड़ा है। इस रिपोर्ट को मत्स्य विभाग ने तैयार कर एसडीएम कार्यालय के तत्कालीन कार्यालय कानूनगो चेतराम को सौंपा था लेकिन कानूनगो ने इस रिपोर्ट को एसडीएम तक नहीं पहुंचने दिया और अपने स्तर पर मामले को रफा-दफा कर दिया था।
फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने जब इस रिपोर्ट पर कार्रवाई के लिए सूचना मांगी तो जवाब मिला कि रिपोर्ट एसडीएम के पास नहीं पहुंची है। इसके बाद उन्होंने पत्र लिखकर एसडीएम से मांग की कि कानूनगो पर कार्रवाई की जाए। इस पर एसडीएम सदर ने उपायुक्त बिलासपुर को पत्र लिखकर इस विषय पर मार्ग दर्शन की मांग की थी लेकिन तीन माह बाद भी उपायुक्त का मार्गदर्शन एसडीएम सदर को नहीं पहुंच पाया है। इसकी पुष्टि समिति द्वारा ली गई रिपोर्ट के पत्र संख्या (बीएलएस-एसडीएम-एसडीके/2018-5289) दिनांक 27-8-2018 से हुई है।
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उधर दूसरी ओर जब समिति ने उपायुक्त कार्यालय से मार्ग दर्शन के बारे में सूचना मांगी तो वहां से चौकाने वाला जवाब आया कि एसडीएम सदर को पेंशन नियम के उपनियम 9 के तहत कार्रवाई करने के आदेश दिए गए हैं। यह आदेश सहायक आयुक्त चेतना खंडवाल ने दिनांक 31-7-2018 को दे दिए हैं। ऐसे में अब सवाल उठता है कि यह आदेश एसडीएम कार्यालय तक क्यों नहीं पहुुंचे, पहुंचे भी है तो क्या अधिकारियों ने इस बीच में ही गायब कर दिया है। ऐसे कई सवाल हैं जो अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हैं।
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वहीं मछुआरों का कहना है कि उनके नुकसान की भरपाई नहीं की जा रही है। न ही उन्हें एनएचआई की और से कोई सकारात्मक जवाब मिला है। ऐसे में उनकी परेशानियां दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं। आने वाले समय में घर का पालन पोषण करना भी मुश्किल हो जाएगा।
 
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