बिलासपुर। क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर सूबे का एक मात्र पहला ऐसा अस्पताल बन गया है जिसमें सिष्टोस्कोपी (दूरबीन के माध्यम से) के माध्यम से पेशाब की थैली को बिना फाड़े पत्थरी का सफल ऑपरेशन हुआ है। यह ऑपरेशन बिलासपुर अस्पताल में तैनात एमएस डॉ. राजेश आहलूवालिया व एमडी सर्जन डॉ. ऋषि नाभ के प्रयासों से सफल हुआ है।
कई दिनों से अस्पताल में दाखिल मरीज नेगी राम उम्र 71 साल गांव पट्टी तहसील घुमारवीं जिला बिलासपुर का यह ऑपरेशन किया गया है। इससे पहले सूबे के किसी भी अस्पताल में इस मशीन से ऑपरेशन नहीं हुआ है। इस ऑपरेशन को करवाने के लिए चिकित्सक शिमला और चंडीगढ़ रेफर करते थे लेकिन अब बिलासपुर अस्पताल में इस आधुनिक सुविधा मिलने से जिलेभर के मरीज लाभान्वित होंगे।
एमएस डॉ. राजेश आहलूवालिया ने बताया कि मरीज को पेशाब की थैली के अंदर पत्थरी थी जिसके चलते मरीज को यहां पर उपचार हो पाना मुश्किल हो गया था लेकिन चिकित्सकों ने सिष्टोस्कोपी मशीन की मदद से यह ऑपरेशन सफल कर दिया। वहीं, ऑपरेशन के समय चिकित्सकों ने मरीज की पेशाब की थैली को बिना फाड़े इसे सफल बनाया है। इसके बाद चिकित्सकों ने पेशाब के रास्ते से पेट तक एक सेंटीमीटर पेट फाड़कर इस ऑपरेशन को किया है। वहीं, इस सफल ऑपरेशन को करने में बिलासपुर अस्पताल सूबे का एक मात्र अस्पताल बन गया है। इस ऑपरेशन को सफल बनाने के लिए एमडी सर्जन डॉ. ऋषि नाभ, एनेस्थीसिया डॉ. मुकेश, स्टाफ नर्स संतोष, पाठक, ओटीए डॉ. उमेश और प्रोमिला की विशेष भूमिका रही है।
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ऑपरेशन के बाद मरीज है बिल्कुल स्वस्थ
बिलासपुर अस्पताल में पहली बार सिष्टोस्कोपी के माध्यम से पेशाब की थैली को बिना फाड़े पत्थरी का ऑपरेशन किया गया है। इससे पहले यह ऑपरेशन शिमला और चंडीगढ़ में हुआ करता था। ऑपरेशन के बाद मरीज बिल्कुल स्वस्थ हैं।
-डॉ. राजेश आहलूवालिया, चिकित्सा अधीक्षक बिलासपुर
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