बिलासपुर। शुक्रवार दोपहर तीन बजे के बाद बिलासपुर में तूफान चला और अंधेरा छा गया। दिन के समय ही चालकों को अपने वाहनों की लाइटें ऑन करनी पड़ीं। आधा घंटा तक चले तूफान से पूरा का पूरा बिलासपुर शहर धूल व मिट्टी की आगोश में समा गया। इसके बाद शुरू हुई बारिश ने लोगों को गर्मी से राहत दिलाई। लोग और दुकानदार घरों व दुकानों से बाहर निकलकर बारिश का लुत्फ उठाने लग पड़े। कई जगहों पर चीड़ के पेड़ भी उखड़ कर सड़क और रास्तों में आ गिरे।
बिलासपुर में पिछले एक सप्ताह से गर्मी के कारण लोगों का जीना दूभर हो गया था। दोपहर के समय तो घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया था। जैसे ही तीन बजे के बाद बारिश व तूफान का दौर शुरू हुआ। सभी के चेहरों पर खुशी छा गई। दिन के समय ही वाहनों की लाइटें ऑन हो गईं। स्वारघाट स्थित बनेर व पंजपीरी के पास चीड़ के भारी पेड़ सड़कों और रास्तों पर आ गिरे। हालांकि किसी तरह के जानमाल का नुकसान नहीं हुआ। लेकिन कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित हो गया। तूफान के चलते ही जिला के ज्यादातर क्षेत्र अंधेरे में डूब गए।
शाहतलाई, बरमाणा, बिलासपुर शहर, घुमारवीं, भराड़ी, बरठीं सहित झंडूता के कई क्षेत्र तूफान चलने से अंधेरे में डूब गए। देर शाम तक कई क्षेत्रों में बिजली बहाल नहीं हो पाई थी। इससे लोगों को परेशानियों का भी सामना करना पड़ा। नेशनल हाईवे पर अंधेरा छाए रहने से वाहनों की रफ्तार कम हो गई। बनेड़ के पास पेड़ गिरने से दोपहिया वाहन चालक बाल-बाल बचे। तूफान से आम की फसल को भी नुकसान पहुंचा है। जो आम पककर तैयार था, वह तूफान के कारण जमीन पर गिर गया। पहले ही 40 फीसदी आम बर्बाद हो चुका है। वहीं इस तूफान से आम की ओर फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है।
बिलासपुर में तूफान ने दुकानदारों को संभलने का मौका नहीं दिया। एकाएक ही चले तूफान से दुकानों का सामान उड़कर सड़कों पर आ गया।