अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन मामले में अब अरण्यपाल मंडी ने भी अवैध डंपिंग साइटों से एनएचएआई को मलबा हटाने के आदेश दिए हैं। वहीं डीएफओ से यह भी पूछा है कि वन भूमि पर मलबा डालने की एवज में जो कंपनी को 50400 जुर्माना लगाया गया था वह अभी तक वसूल क्यों नहीं किया गया। इसकी भी पूरी रिपोर्ट अरण्यपाल मंडी उपासना ने तलब की है।
उल्लेखनीय है कि बिलासपुर से सुंदरनगर तक सड़क निर्माण के मलबे को वन भूमि में अवैध रूप से डंप किया गया है। हालत ऐसी थी कि मलबा डालने से पहले निर्माण कार्य में लगी कंपनी ने सुरक्षा दीवार तक लगाना उचित नहीं समझा। अब यह मलबा पानी के बहाव से अलसेड खड्ड, गमोह नाला और गासी नाला से होते हुए गोबिंद सागर झील में समा रहा है जिससे पर्यावरण और मछली उत्पादन प्रभावित हुआ है।
वहीं इस क्षेत्र में बने श्मशानघाटों को भी नुकसान पहुंचा है जिससे लोगों को आए दिन परेशानियों से दो चार होना पड़ रहा है। हालांकि इससे पूर्व वन विभाग ने कई स्थानों पर मौका निरीक्षण किया था। इसके बाद जुर्माना लगाया गया था लेकिन अभी तक 50400 जुर्माना जमा नहीं हो पाया है। जो अपने आप में कई बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
वहीं फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में अरण्यपाल मंडी को पत्र लिख कर शिकायत भेजी थी जिस पर कार्रवाई करते हुए डीएफओ सुुंदर नगर को मलबा हटाने और जुर्माना वसूल करने के आदेश दिए गए हैं। वहीं इस पूरे मामले की रिपोर्ट अरण्यपाल कार्यालय में मांगी गई है।
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