अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर (बिलासपुर)। कांगड़ा जिला के देहरा में मात्स्यिकी विभाग हिमाचल प्रदेश की ओर से एक दिवसीय मछुआरा सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता वीरेंद्र कंवर ग्रामीण विकास, पंचायती राज पशुपालन विभाग व मत्स्य मंत्री वीरेंद्र कंवर ने की।
मंत्री ने कहा कि गत वर्ष पौंग जलाश्य से 413.3 मीट्रिक टन मछली का उत्पादन हुआ और इससे प्रदेश को एक करोड़ 89 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। पौंग जलाश्य के अंतर्गत वर्तमान में 15 सहकारी सभाएं पंजीकृत हैं तथा मत्स्य विभाग द्वारा 2674 मछुआरों को मछली पकड़ने के लिए 5348 लाइसेंस जारी किए गए हैं। मत्स्य उत्पादन से मछुआरों को 6 करोड़ 67 लाख रुपये की आय प्राप्त हुई है।
ग्रिल जाल सहायता योजना के अधीन गत वर्ष 320 मछुआरों को लाभान्वित किया गया, जिस पर 9 लाख 75 हजार रुपये की राशि व्यय की गई। इस योजना के अधीन इस वर्ष 310 मछुआरों को लाभान्वित किया जाएगा। प्रदेश के कुल 12560 मछुआरों व मत्स्य पालकों को प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत 2 लाख रुपये का नि:शुल्क बीमा कवर प्रदान किया गया है। जलाश्य मछुआरों को उपकरण उपलब्ध करवाने के लिए 35 करोड़ 50 लाख रुपये की योजना तैयार की गई है। मछुआरों के प्रतिनिधिमंडल की मांग को स्वीकार करते हुए आगामी वित्त वर्ष से प्रत्येक मछुआरे को एक-एक लाइफ जैकेट प्रदान की जाएगी ताकि अकारण तूफान के दौरान जानमाल की हानि से बचा जा सके। प्रदेश सरकार ने इस वर्ष 200 मछुआरा आवास स्वीकृत करने का प्रावधान रखा है जिस पर प्रति मछुआरा एक लाख 30 हजार रुपये प्रदान करने का प्रावधान है।
निदेशक एवं प्रारक्षी मत्स्य सतपाल मेहता ने विभाग की कल्याणकारी योजनाओं की चर्चा करते हुए कहा कि प्रदेश में मत्स्य पालन में अपार संभावनाएं मौजूद हैं और बेरोजगार युवा अपने निकटतम मत्स्य अधिकारी के कार्यालय में जाकर उनकी जानकारी लेकर अपना व्यवसाय आरंभ कर सकते हैं।
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