अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। अखिल भारतीय साहित्यिक परिषद एवं कहलूर सांस्कृतिक मंच के संयुक्त तत्वाधान में प्रेस क्लब बिलासपुर में शनिवार को दिवंगत प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को काव्यात्मक श्रद्धांजलि दी। कसौली के पूर्व विधायक सतपाल कंबौज इस कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि तथा व्यापार मंडल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष तरुण टाडू तथा महामंत्री सुरेंद्र गुप्ता क्रमश: अध्यक्ष व विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस मौके पर वाजपेयी के चित्र पर पुष्पांजलि भेंट की और दो मिनट का मौन रखा गया।
इस मौके पर कुलदीप चंदेल ने काव्यात्मक श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि ‘धन्य-धन्य वाजपेयी अटल बिहारी, राजनीति मेें राजधर्म का पाठ, जनमानस को जिसने पढ़ाया...’, डॉ. जय नारायण कश्यप ने ‘अटल बिहारी की छवि न्यारी...’,ओंकार कपिल ने ‘अल विदा अटल जी..’, डॉ. सुरेंद्र सुमन ने वाजपेयी जी की कविता ‘धरती को बौनों की नहीं...’, पढ़ी।
इसके बाद मंच पर आए डॉ.एआर सांख्यान ‘मेरी मैत्री तू हारा कारगिल, हमने तो ले आए थे अपनी बस दिल्ली से लाहौर...’,जीत राम सुमन ने ‘वे सबको जगाकर चले गए...’, सुशील पुंडीर ने ‘आना जाना तो जहां में चला रहता है..’, रतन चंद निर्झर ने वाजपेयी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वे साहित्य, पत्रकारिता, व राजनीति के त्रिवेणी, सरस्वती के मानस पुत्र तथा हिंदी को विश्व स्तर पर लोकप्रिय बनाने के लिए जाने जाते रहेंगे। हुसैन अली ने ‘बाधाएं आती हैं आएं...’,आनंद सोहर ने ‘तन भी बोझल, मन भी बोझल...’,नवल किशोर ने वाजपेयी की कविता ‘भरी दोपहरी में अंधियारा...’,सुख राम आजाद ने ‘ऊंचे पहाड़ पर पेड़ नहीं लगते...’,अरूण डोगरा रीतु ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी के कद का नेता आज तक की राजनीति में नहीं हुआ है। रविंद ने लाल किले से वाजपेयी का भाषण याद करते हुए सुनाया।
इस अवसर पर मुख्यातिथि सतपाल कंबौज ने कहा कि वाजपेयी जैसे नेता सदियों के बाद जन्म लेते हैं। उन्हें अटल के साथ राजनीति में सीखने का मौका मिला है।
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