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बुर्जियां लगाई है लेकिन हमारे पास प्रमाण नहीं

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elevated road
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रितेश गुलेरिया
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बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण में बरती जा रही लापरवाही के आए दिन नए खुलासे हो रहे हैं जिससे पूरी कार्य प्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। हाल ही में खुलासा हुआ था की फोरलेन निर्माण के लिए 9 गांव का भूमि अधिग्रहण प्लान बदल डाला है, वहीं अब विभाग ने दावा किया है सड़क निर्माण के लिए बुर्जियां तो लगाई हैं लेकिन इस संबंध में उनके पास कोई प्रमाण नहीं है। ऐसे में सवाल है कि बिना प्रमाण के कैसे काम किया गया और इस कार्य को करने वालों को किस आधार पर काम की पेमेंट की गई।
इस पूरे मामले का खुलासा फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति की ओर से सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई सूचना से हुआ है। इस संबंध में समिति की ओर से भूमि अधिग्रहण की विशेष इकाई बिलासपुर, परियोजना निदेशक एनएचएआई मंडी जिला वन अधिकारी सुंदरनगर, जिला वन अधिकारी बिलासपुर से इस संबंध में सूचना मांगी गई थी। इस पर सभी विभागों की ओर से 12 जानकारियां दी गईं। विभागों का दावा है कि फोरलेन निर्माण के लिए बुर्जियां लगाई गई हैं लेकिन उनके कार्यालय में इसके कोई प्रमाण नहीं है। यहां तक की सूचना में बुर्जियां लगाने वाली संस्था का नाम तक नहीं है।
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समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा का कहना है कि उन्हें जो सूचनाएं मिली हैं उसमें कहा गया है कि संबंधित विभागों के पास इसका कोई रिकार्ड नहीं है। इसका मूल कारण यह बताया गया कि न उनके पास राजस्व विभाग के अधिकारियों की कोई कारगुजारी, रोजनामचा और टूर डायरी मौजूद नहीं है। मदन लाल शर्मा का कहना है कि अगर संबंधित विभागों के पास कोई रिकार्ड नहीं है तो फिर वह कैसे दावा कर रहा है कि बुर्जियां लगाई गई हैं।
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भू-अर्जन अधिकारी चेतना खंडवाल, परियोजना निदेशक लै. कर्नल योगेश चंद्रा ने बताया कि जो सूचना कार्यालय में मौजूद है वह मुहैया करवा दी गई है।
एक्ट 1956, 3बी में साफ कहा गया है कि सड़क निर्माण में सब से पहला कार्य बुर्जियां लगाने का होगा जिससे रोड अलाइनमेंट प्लान की दिशा और दशा तय होती है। वहीं उसी के आधार पर भूमि अधिग्रहण प्लान भी तैयार होता है।
 
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