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दुकानों का किराया नहीं वसूल पाई पंचायत समिति

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सुरेंद्र जम्वाल
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घुमारवी (बिलासपुर)। विकास खंड घुमारवीं की ओर से अपने कार्यालय के साथ बनाई गई दुकानों को जिन लोगों को आवंटित किया है, उनके मालिकों के बारे में उन्हें पता ही नहीं है कि वह जीवित भी हैं या मर गए हैं। विकास खंड घुमारवीं ने यह दुकानें पंचायत समिति के माध्यम से लोगों को उपलब्ध करवाई थी, यह दुकानें सन 1994-95 में लोगों को आवंटित की गई थीं।
आवंटित दुकानें विकास खंड घुमारवीं की पंचायतों के उन लोगों को दी जाती हैं जो आईआरडीपी व गरीब परिवार से संबंध रखता हो। समिति की ओर से जो किराया 1994-95 में लिया जाता था वह ही किराया आज भी लिया जाता है। ऐसे में पर जिन लोगों को यह दुकानें आवंटित की गई हैं वह समय पर अपना किराया भी जमा नहीं करवाते हैं।
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समिति के पास कुल 14 दुकानें हैं, जिनका किराया 100 से 250 रुपये तक है। 13 दुकानों का किराया 250 रुपये हैं, तो एक दुकान का किराया मात्र 100 रुपये हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि इतना कम किराया दे पाने में भी दुकानदार असमर्थ है। समिति को अभी तक 5, 47,200 रुपये किराया लेना अभी बाकी है।
पंचायत समिति के प्रधान दिनेश शर्मा का कहना है कि पंचायत समिति के द्वारा किराये को वसूलने के लिए तीन बार दुकानदारों को नोटिस भेजे जा चुके हैं। किराया न देने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी अमल में लाई जा सकती हैं।
वहीं, विकास खंड अधिकारी जीतराम चौधरी का कहना है कि सबलेटिंग के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है इसके बारे में पता किया जाएगा। जो दुकानें बंद हैं उसका भी पता लगाया जाएगा कि क्यों बंद है। जिस व्यक्ति के नाम दुकान आवंटित की है वह जीवित हैं या नहीं, इसके बारे में भी शीघ्र पता करवाया जाएगा।
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इनसेट...
पंचायत समिति के पास कितनी दुकानें
पंचायत समिति के पास 14 दुकानें हैं। सबसे ज्यादा किराया जो एक दुकानदार को भुगतान करने को हैं वह 76000 रुपये है। सबसे कम 6500 रुपये बचता है। कुछ दुकानदारों ने यह दुकानें आगे सबलेटिंग कर रखी है और उनसे 1000 रुपये से लेकर 2500 रुपये किराये के रूप में वसूलते हैं, जो आगे विकास खंड कार्यालय में जमा नहीं करवाते हैं। समिति भी तीन बार नोटिस भेजने के बाद कुछ ही किराया वसूल पाई है और बाकी वैसे के वैसा ही पड़ा है।
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