बिलासपुर। प्रदेश के एनपीएस कर्मचारियों ने प्रदेश सरकार से पुरानी पेंशन बहाली की मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि हिमाचल में मई 2003 के बाद नियुक्त कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन बंद करके नई पेंशन प्रणाली बनाकर सामाजिक सुरक्षा से जोड़ा है, जो किसी भी तरह से कर्मचारी हितैषी नहीं है।
एनपीएस कर्मचारी एसोसिएशन के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य जगदेव ठाकुर, जिला बिलासपुर के प्रधान राजेंद्र कुमार, उपप्रधान हेमराज, महासचिव पूनम डोगरा, घुमारवीं खंड प्रधान खूब सिंह ठाकुर, सदर खंड प्रधान शशि पाल, झंडूता खंड प्रधान विनय कुमार ने कहा कि जिस निजी कंपनी को सरकार 10 प्रतिशत और कर्मचारी के वेतन से 10 प्रतिशत काटकर जमा किया जा रहा है। वह कंपनी खुद तो शेयर मार्केट में इस पैसे को लगाकर करोड़ों रुपये बटोर रही हैं। लेकिन, जिनका यह पैसा है, उन्हें इसका नाममात्र वापस करके दर-दर की ठोकरें खाने पर मजबूर कर रही है।
दो तरह की पेंशन प्रणालियों ने भी कर्मचारियों की समानता का अधिकार छीन लिया है। पुरानी पेंशन के दायरे में आने वाले कर्मचारी रिटायरमेंट के बाद आराम से रह रहे हैं। नई पेंशन स्कीम के तहत रिटायर कर्मी अपने ही पैसों से महरूम हो रहे हैं। उन्हें मात्र 500 से 1000 हजार रुपये तक सामाजिक सुरक्षा पेंशन की तरह साठ साल के बाद देने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि मई 2003 के बाद और आज दिन तक लगभग एक लाख कर्मचारी नियुक्त हुए हैं जो नई पेंशन प्रणाली के तहत आते हैं। इस नई पेंशन प्रणाली के तहत सरकार को व कर्मचारियों को भी करोड़ों रुपये का घाटा है। इसका लाभ केवल मात्र निजी कंपनी को हो रहा है। इन्होंने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से अपील की है कि एनपीएस कर्मचारियों की पुरानी पेंशन प्रणाली को शीघ्र बहाल किया जाए।