अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण में भारत सरकार की अनुमति के बिना बदले गए भूमि अधिग्रहण प्लान को लेकर 20 दिसंबर को हुई बैठक में एनएचएआई के पदाधिकारी नहीं पहुंचे। इस पर वन विभाग ने कड़ा संज्ञान लेते हुए अब पांच दिनों के भीतर अपने स्तर पर फोरलेन में बरती जा रही अनियमितताओं की रिपोर्ट तैयार करने का आश्वासन दिया है। रिपोर्ट तैयार कर आला अधिकारियों व मंत्रालय को भेजी जाएगी जिसकी एक प्रतिलिपि फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति को भी सौंपी जाएगी। खबर की पुष्टि अरण्यपाल आरएस पटियाल वन वृत्त बिलासपुर ने की है। मामले को लेकर फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा उनसे स्वयं मिले थे।
गौरतलब है कि एनएचएआई ने नौ गांवों के नौ किलोमीटर के अंदर पौने चार किलोमीटर के भूमि अधिग्रहण प्लान को बदल दिया। सड़क निर्माण से निकलने वाली मिट्टी को गोबिंद सागर झील, खड्डों, नालों में डंप कर दिया गया। बिना रोड अलाइनमेंट प्लान के और बिना बुर्जी लगाए लाखों पेड़ों को काट दिया गया। इसके अलावा वन भूमि में डंप की गई मिट्टी को उठाने के लिए राज्य में दोहरे मापदंड अपनाने के बारे में वन विभाग के आला अधिकारियों को समिति ने शिकायत की थी जिसमें दर्जनों पत्र लिखने के बाद अब यह कार्रवाई विभाग की ओर से अमल में लाई जा रही है।
गौर रहे ही इस अवैध मक डंपिंग से पर्यावरण, मछली उत्पादन, भाखड़ा बांध के अस्तित्व पर असर पड़ा है। जहां साल दर साल मछली उत्पादन घटा है, वहीं पर्यावरण को भी खासा नुकसान हुआ है। जबकि वन विभाग कई दफा कंपनी को अवैध डंपिंग मामले में जुर्माना भी लगा चुका है। अरण्यपाल आरएस पटियाल वन वृत्त बिलासपुर ने बताया कि उपरोक्त विषयों व अन्य अनियमितताओं को लेकर रिपोर्ट पांच दिन में तैयार की जाएगी, जो आला अधिकारियों को भेजने के साथ-साथ समिति को भी सौंपी जाएगी।