बिलासपुर। कहलूर लोकोत्सव के दूसरे दिन 45 से अधिक सांस्कृतिक दलों और महिला मंडलों ने बिलासपुर लोक संगीत, लोक नृत्यों, लोक नाट्य और लोक गीतों की सतरंगी छटा बिखेरी। लोक नाट्य धाजा और लोक गायन गुगा जाहर पीर की प्रस्तुतियों और संस्कार गीतों से लोक कलाकारों ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। प्राचीन वाद्य यंत्रों मौलिक लोक गायन व पारंपरिक वेशभूषा से सुसज्जित लोक कलाकारों ने सशक्त एवं प्रभावी प्रस्तुतियां दीं।
राज्य स्तरीय नलवाड़ी मेले के कहलूर लोकोत्सव में बतौर मुख्यातिथि अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी एवं अध्यक्ष सांस्कृतिक उप समिति विनय कुमार ने शिरकत की। उन्होंने कहा कि मौलिक लोक संस्कृति प्राचीन युग की धरोहर है। इसमें प्राचीन लोक सांस्कृतिक विरासत का प्रतिबिंब परिलक्षित होता है।
उन्होंने कहा कि गत वर्षों की अपेक्षा इस वर्ष अधिक लोक कलाकारों ने कहलूर लोकोत्सव में अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित करने में रुची दिखाई है जो एक सुखद अनुभूति है। उन्होंने कहा कि लोक कलाकारों को उचित मंच, मानदेय व सम्मान देने के लिए कहलूर लोकोत्सव सशक्त भूमिका निभा रहा है।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यातिथि ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया। जिला भाषा अधिकारी नीलम चंदेल ने मुख्यातिथि को शॉल व टोपी भेंट कर सम्मानित किया।
इस अवसर पर महिला मंडल जोहड़, मलागण, समलेटा, जिनणु, औहर, कोलका, द्रोबड, ज्योर रौणा, दयोली, धराडसानी, कामली, मरहोल, बखैल दयाली, पजैल कलां कंज्योटा, महन, भंजवाणी दबेटा स्वारघाट, कोठीपुरा प्लासी, धार टटोह, तरेड तुंगडी कनौण मानर, मानवा, तलसरी, कंदरौर सुहाणी, दयोथ, तरेड, दनोह, बाग खुर्द आदि के लोक कलाकारों ने लोक गायन एवं लोकनृत्य से दर्शकों को तालियां बजाने को मजबूर किया। इस अवसर पर लोक गायकों ने बिलासपुरी लोक गायन की स्वर लैहरियों से माहौल को संगीतमय बना दिया।