पूर्व सैनिक के मकान गिरने का मामला पहुंचा सेना अध्यक्ष के पास
इस संबंध में रक्षा मंत्रालय की ओर से मांगा गया है मामले का पूरा रिकार्ड
इस बारे में अब परियोजना निदेशक को दिए गए हैं कार्रवाई के आदेश
अगर कार्रवाई करने में सक्षम नहीं तो भी निदेशक को बताना होगा कारण
अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। नेरचौक-कीरतपुर फोरलेन निर्माण के नाम पर पूर्व सैनिक और उसके साथ लगते तीन और मकानों को गिराने का मामला सेना के मुख्य कार्यालय पहुंच चुका है। पूर्व सैनिक ने सेना के मुख्य कार्यालय में पत्र लिख कर हस्तक्षेप कर उन्हें न्याय दिलाने की मांग की है क्योंकि पूर्व सैनिक और उसके साथ लगते तीन घरों को हाईकोर्ट के आदेशों का हवाला देकर 19 मार्च 2018 को गिरा दिया गया था लेकिन पूर्व सैनिक मदन लाल शर्मा का कहना है कि कार्रवाई के दौरान उन्हें किसी प्रकार की सूचना नहीं दी गई। वहीं मकान गिरने से पहले किसी प्रकार की निशानदेही नहीं दी गई। इसके बाद आरटीआई से भी सूचना मांगी गई लेकिन उसमें भी कोई अधिकारी संतोषजक जवाब नहीं दे पाया।
इसके बाद पूर्व सैनिक ने इस संबंध में भारतीय थन सेना अध्यक्ष नई दिल्ली को पत्र लिख कर हस्तक्षेप की मांग की। पत्र में कहा गया कि परियोजना निदेशक सेना अधिकारी है लेकिन इसके बाद भी उनकी बातों को नहीं सूना जा रहा है। पत्र में पूर्व सैनिक ने कहा कि न तो उनका मकान रोड अलाइनमेंट प्लान, न ही भूमि अधिग्रहण प्लान और न आईआरसी की गाइड लाइन में आता है लेकिन इसके बाद भी उनके मकान के साथ उनके भाइयों के मकानों को जबरन और बदले की भावना से गिराया गया।
इस पर केंद्रीय सैनिक बोर्ड मंत्रालय दिल्ली की ओर से निदेशक सैनिक बोर्ड हिमाचल प्रदेश को पत्र लिख कर इस मामले में हस्तक्षेप कर पूरी रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है। इसके बाद आगे की कार्रवाई के लिए क्षेत्रीय कार्यालय एनएचएआई शिमला को कार्रवाई कर रिपोर्ट देने को कहा है। इसके बाद शिमला से परियोजना निदेशक को इस मामले में तत्काल कार्रवाई के आदेश दिए हैं। वहीं कहा है कि निदेशक इस कार्रवाई करने में सक्षम नहीं है तो इसका भी कारण दें। खबर की पुष्टि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के तकनीकी अधिकारी राहुल शर्मा ने की है।
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