स्टडी लीव न मिलने से लटकी प्रमोशन
वन रक्षकों की ओर से सौंपा गया ज्ञापन गुमराह करने वाला : एसोसिएशन
वन खंड अधिकारियों खाली चल रहे 100 पदों को जल्द भरे सरकार
अमर उजाला ब्यूरो
स्वारघाट (बिलासपुर)। हिमाचल प्रदेश फोरेर्स्टी एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने विभाग के कुछ वन रक्षकों की ओर से सौंपे गए ज्ञापन को गुमराह करने वाला और सच्चाई से परे और स्वार्थ सिद्ध करने वाला बताया है। एसोसिएशन के प्रदेश प्रधान तुलसी राम, महासचिव पवन शर्मा, उपप्रधान दाताराम, अतिरिक्त सचिव दिनेश कुमार, बिलासपुर वन वृत्त के प्रधान सुशील कुमार, बिलासपुर वन मंडल के प्रधान देशराज ने एक संयुक्त बयान में कहा कि ये वही लोग हैं, जो 2007 मे बतौर वन रक्षक भर्ती हुए थे। तब उन्होंने सभी नियमों को दरकिनार कर 2 साल बाद ही बीएससी फॉरेर्स्टी के लिए स्टड्डी लीव पर चले गए थे, जबकि ये लोग विभाग में 5 साल तक अपनी सेवाएं प्रदान करने के बाद स्टडी लीव पर जाने के हकदार थे। जबकि जिन वन रक्षकों ने 5 साल का सेवाकाल पूरा होने के बाद बीएससी फॉरेसर्टी करने के लिए वन विभाग से मंजूरी मांगी थी, लेकिन उन्हें मंजूरी नहीं दी थी। इस कारण ये वन रक्षक स्टड्डी लीव और पदोन्नत्ति के लिए तरस रहे हैं।
उन्होंने बताया कि 2007 के दौरान प्रदेश सरकार के वन विभाग ने सब कुछ दरकिनार करते हुए अपने चहेतों को बीएससी फॉरेसर्टी के लिए स्टडी लीव पर भेज दिया था। ऊपर से इन लोगों ने स्टडी लीव के दौरान पूरा वेतन भी लिया है। उन्होंने बताया कि इस बात का विरोध विभाग के वे वन रक्षक कर रहे हैं, जो दूरदराज क्षेत्रों में तैनात है। एसोसिएशन ने प्रदेश सरकार और वन मंत्री से आग्रह किया है जो वनरक्षक पदोन्नति के लाभ का ज्ञापन सौंपने गए थे पहले उनके सभी तथ्यों की जांच की जाए, ताकि अन्य वनरक्षक जो पदोन्नति की राह देख रहे हैं उनके साथ अन्याय न हो। इस समय प्रदेश भर में वन खंड अधिकारियों के करीब 100 पद खाली पड़े हैं। उन्होंने वन मंत्री से आग्रह किया हैं कि संघ को बैठक का शीघ्र समय दिया जाए, ताकि कर्मचारियों तथा अधिकारियों की समस्याओं को दूर किया जा सके।