अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर।
जंगली जानवरों को खदेड़ने के लिए ली गईं बंदूकें लोगाें के लिए ही जानलेवा साबित हो रही हैं। जकातखाना में गोलीकांड इसी क्रम को बयान करने वाला है। इलाके में वन्य जीवों के हमलों से बचने के लिए ज्यादातर घरों में लाइसेंसी बंदूके हैं। लेकिन आवेश में आकर इन्हीं बंदूकों की गोली इंसानों पर दागी जा रही है। जकातखाना गांव की घटना में न सिर्फ जंगली जानवरों को खदेड़ने के लिए ली गई बंदूक से दीपक को गोली दाग दी गई बल्कि जंगली जानवरों की गफलत में गोली के शिकार युवक ने रात भर घर के पास ही तड़प तड़क कर दम तोड़ दिया।
दरअसल शनिवार की रात को लोगाें ने गोली चलने की आवाज सुनी थी लेकिन किसी जानवर को खदेड़ने के लिए गोली चलाए जाने का अनुमान लगाकर कोई घर से बाहर नहीं आया। सुबह खून से लथपथ दीपक का शव मिलने पर परिजन और ग्रामीण खुद को इसी गफलत के चलते कोस रहे हैं। हर किसी की जुबान पर यही है कि गोली चलने की आवाज पर दीपक तक पहुंच जाते तो उसे बचाया जा सकता था। घटनास्थल के हालात बता रहे हैं कि जांघ पर गोली लगने के बाद दीपक देर तक तड़पता रहा। आसपास के घरों में लोग इस घटना से अंजान सोए रहे जबकि बाहर दीपक खून बहने से तिल तिल जान दे रहा था।