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सात दिन में मलबा उठाएं और मछुआरों को दें मुआवजा

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अमर उजाला ब्यूरो
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बिलासपुर। कीरतपुर-फोरलेन निर्माण कार्य के दौरान नदी नालों और वन भूमि में की गई अवैध डंपिंग और मछुआरों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए प्रशासन ने परियोजना निदेशक और निर्माण कार्य में लगी कंपनी को अंतिम मौका दिया है।
प्रशासन की ओर से जारी पत्र में साफ कहा गया है कि यह आप के लिए अंतिम मौका है। इसके बाद कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगा। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी प्रशासन की ओर से कई बार परियोजना निदेशक और निर्माण कार्य में लगी कंपनी के निदेशक को पत्र लिखे जा चुके हैं लेकिन इसके बाद भी इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की गई। इससे प्रशासन की कार्य प्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर बार-बार प्रशासन के आदेशों के बाद भी कोई कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है।
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उल्लेखनीय है कि पूर्व संयुक्त कमेटी जो एसडीएम की अध्यक्षता में बनी थी कि जांच में पाया गया है कि जहां नदी नालों और गोबिंदसागर में अवैध डंपिंग हुई है वहीं इससे मछली उत्पादन भी गिरा है। वहीं मछुआरों के जाल और बोटों को भी नुकसान पहुंचा है। निरीक्षण के बाद एसडीएम कार्यालय ने परियोजना निदेशक एनएचएआई और परियोजना निदेशक आईएलएंडएफएस कंपनी के निदेशक को नोटिस जारी कर उक्त नुकसान की भरपाई 20 दिनों में करने के आदेश दिए थे। इसके बाद दूसरे नोटिस में सात दिन का समय दिया गया लेकिन उसके बाद भी कंपनी ने प्रशासन की एक बात नहीं मानी है। अब प्रशासन की ओर से अंतिम नोटिस एसडीएम प्रियंका वर्मा के कार्यालय ये पत्र संख्या बीएलएस-एसडीएम-एसडीके/2018 4503 सोमवार को जारी कर सात दिन में नुकसान की भरपाई और मौके से मलबा उठाने का कहा गया है। अब बड़ा सवाल है कि जब पहले कंपनी ने प्रशासन के आदेश को ठेंगा दिखाया है तो अब क्या वह इस आदेश को मानेेंगे।
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इधर, इस संबंध में फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति बिलासपुर के उप प्रधान राकेश कुमार, उप प्रधान चिंता देवी, कोषाध्यक्ष श्रवण कुमार, महा सचिव मदन लाल ने बताया कि यह सब प्रशासन और कंपनी की मिली भगत से हो रहा है। यही कारण है कि प्रशासन रस्मों को अदा करने के लिए पत्र लिख कर अपने कार्य की इतिश्री कर रहा है।
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