अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। जिला प्रशासन का लोगों के कार्यों केे प्रति उदासीन रवैया इस कदम हावी है कि बिलासपुर मुख्यालय का तहसील कार्यालय राम भरोसे चल रहा है। यहां पर कार्यरत तहसीलदार मेडिकल छुट्टी पर चल रहे हैं और जो नायब तहसीलदार का पद स्वीकृत है वह रिक्त चल रहा है। ऐसे में यहां पर न तो प्रमाण पत्र बन पा रहे हैं, न ही लोगों के इंतकाल हो पा रहे हैं। दूरदराज की पंचायतों से आने वाले ग्रामीण अब परेशान हो चुके हैं।
अधिवक्ता भगत सिंह वर्मा सहित अन्य ग्रामीणों का कहना है कि प्रदेश सरकार को बने हुए छह माह से ज्यादा का समय हो गया है, लेकिन अभी तक लोगों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, वहीं बाकी की कसर प्रशासन पूरी कर रहा है।
बिलासपुर जिला की मुख्यालय तहसील की हालत इतनी दयनीय है कि यहां पर तहसीलदार के छुट्टी पर जाने के बाद नायब तहसीलदार इधर-उधर की तहसीलों से डेपुटेशन पर दो से तीन घंटे के लिए लाने पड़ रहे हैं जिससे कोई भी कार्य तय समय पर नहीं हो पा रहा है। जबकि प्रशासनिक अधिकारी अपने कमरों में आराम से बैठ कर नेताओं को खुश करने लगे हुए हैं।
भगत सिंह वर्मा का कहना है कि स्थायी नायब-तहसीलदार के यहां पर न बैठने से न तो बच्चों के प्रमाण पत्र बन पा रहे हैं, न हिमाचल प्रमाण पत्र बन पा रहे हैं, न ही लोगों के जरूरी इंतकाल हो पा रहे हैं। पिछले दस दिनों से जिला मुख्यालय की तहसील राम-भरोसे चल रही है। इनका कहना है कि प्रशासन को चाहिए था कि यहां पर स्थायी तौर पर नायब-तहसीलदार के पद को भरा जाए ताकि लोगों को परेशानियों का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा है कि अगर 15 दिन के भीतर नायब तहसीलदार का पद नहीं भरा गया तो जिला मुख्यालय में ग्रामीणों के साथ प्रदर्शन किया जाएगा।