महायज्ञ का आगाज वीरवार दो जनवरी को संघेड़ा रस्म के साथ होगा। तीन जनवरी को मंदिर में शिखा पूजन की रस्म निभाई जाएगी। चार जनवरी को बेड़ा डालने की मुख्य रस्म होगी। इसमें रस्सी को ऊंची पहाड़ी से नीचे तक बांधा जाएगा। रस्सी पर काठ की घोड़ी पर बेड़े (देवता की ओर से चयनित व्यक्ति) को बैठाकर पहाड़ी से नीचे छोड़ा जाएगा। रस्सी पर फिसलकर बेड़ा पहाड़ी से दूसरे छोर तक जाता है। यह भूंडा महायज्ञ की मुख्य रस्म होगी। पांच जनवरी को उछड़-पाछड़ रस्म के साथ महायज्ञ का समापन होगा। दलगांव में वर्ष 1985 में भूंडा महायज्ञ हुआ था। उसके बाद अब जनवरी 2025 में महायज्ञ हो रहा है।