आखिरी चरण में वापसी कर मेडल अपने नाम किया
दो दिन बाद सीमा एशियन गेम्स में ही 5,000 मीटर दौड़ में भी भाग लेंगी। कांस्य पदक के बाद अब हिमाचल समेत पूरे देश को सीमा से और उम्मीदें बढ़ गईं हैं। मौजूदा एशियन गेम्स के एथलेटिक्स में भारत का पहला पदक है। सीमा शुरुआत में आगे थी, लेकिन बीच में वह पीछे रह गईं। हालांकि, उन्होंने आखिरी चरण में वापसी कर मेडल अपने नाम किया। स्पर्धा में बहरीन की विनफ्रेड यावी ने 32:39.18 का समय लेकर स्वर्ण और जापान की नोजोमी तनाका ने 32:41.54 के समय के साथ रजत पदक जीता।
2026 में भी लगातार सुधारा खेल
एशियन गेम्स से पहले सीमा ने इस साल 10 हजार मीटर में 32:02.43 का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय दर्ज किया था। एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया और वर्ल्ड एथलेटिक्स के रिकॉर्ड में यह उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ दर्ज है। एशियन गेम्स के फाइनल में उन्होंने 32:50.05 का समय निकालकर कांस्य पदक अपने नाम किया।
उड़नपरी की अब तक की उपलब्धियां
2015: जूनियर राष्ट्रीय एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 3,000 मीटर में स्वर्ण पदक जीता।
2018: यूथ एशियन ओलंपिक क्वालीफिकेशन प्रतियोगिता में रजत पदक हासिल किया।
2022: राष्ट्रीय खेलों में 10,000 मीटर में स्वर्ण और 5,000 मीटर में रजत पदक जीता।
2023: राष्ट्रीय खेलों में 5,000 और 10,000 मीटर दोनों में स्वर्ण पदक जीते। सीनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप में भी 10,000 मीटर का स्वर्ण और 5,000 मीटर का रजत उनके नाम रहा।
2024: हांगकांग में 17वीं एशियन क्रॉस-कंट्री चैंपियनशिप में 10,000 मीटर का स्वर्ण पदक जीता।
2025: कोलकाता में टाटा स्टील वर्ल्ड 25 के में स्वर्ण पदक जीता और 25 किलोमीटर में राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया-समय 1:26:04।
2026: 10,000 मीटर में 32:02.43 मिनट का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया। विश्व एथलेटिक्स के रिकॉर्ड में सीमा को चार बार की राष्ट्रीय चैंपियन और एशियन यूथ ओलंपिक क्वालीफिकेशन की रजत पदक विजेता के रूप में दर्ज किया गया है। सीमा की उपलब्धियों में राष्ट्रीय खेलों के स्वर्ण, एशियन क्रॉस-कंट्री का स्वर्ण और 25 किमी का राष्ट्रीय रिकॉर्ड प्रमुख पड़ाव हैं।
जीत के बाद अमर उजाला से बोलीं - अगला मिशन ओलंपिक मेडल
जीत के बाद अमर उजाला से बातचीत में सीमा ने कहा कि अगला लक्ष्य अमेरिका के लॉस एंजिल्स में वर्ष 2028 में होने वाले ओलंपिक में देश को मेडल दिलाना है। अब पदक जीतने के बाद आराम नहीं करना है बल्कि ओलंपिक के लिए और मेहनत करनी है।
कठिनाइयों के बीच बीता बचपन
सीमा का सफर चंबा के दुर्गम रेटा गांव से शुरू हुआ। शुरुआती दौर में सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने दौड़ की तैयारी की। वर्ष 2015 में उनका चयन भारतीय खेल प्राधिकरण के तहत धर्मशाला के साई केंद्र में प्रशिक्षण के लिए हुआ। इसके बाद उनकी प्रतिभा को बेहतर प्रशिक्षण और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं का मंच मिला। वर्ष 2018 में वह खेलो इंडिया योजना से भी जुड़ीं। सीमा ने इसके बाद लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। 2024 में हांगकांग में हुई 17वीं एशियन क्रॉस कंट्री चैंपियनशिप में उन्होंने 10 हजार मीटर में स्वर्ण पदक जीता। विश्व एथलेटिक्स के रिकॉर्ड में सीमा को चार बार की राष्ट्रीय चैंपियन और एशियन यूथ ओलंपिक क्वालीफिकेशन की रजत पदक विजेता के रूप में दर्ज किया गया है। सीमा की उपलब्धियों में राष्ट्रीय खेलों के स्वर्ण, एशियन क्रॉस-कंट्री का स्वर्ण और 25 किमी का राष्ट्रीय रिकॉर्ड प्रमुख पड़ाव है।