शिक्षा मंत्री ने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आने वाले समय में शिक्षा, उद्योग, स्वास्थ्य, कृषि और प्रशासन सहित हर क्षेत्र की दिशा तय करेगी। इसी को देखते हुए प्रदेश में एआई यूनिवर्सिटी की स्थापना का प्रस्ताव तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। इसको लेकर राज्य सरकार अन्य राज्यों के मॉडल भी स्टडी करेगी। इस विश्वविद्यालय में एआई, मशीन लर्निंग, डाटा साइंस, साइबर सुरक्षा, रोबोटिक्स और उभरती तकनीकों से जुड़े विशेष कोर्स शुरू किए जाएंगे।
इससे युवाओं को अत्याधुनिक तकनीकी शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा और हिमाचल राष्ट्रीय स्तर पर नवाचार एवं तकनीकी शिक्षा के केंद्र के रूप में उभर सकता है। बैठक में स्कूलों की निरीक्षण प्रणाली को आधुनिक बनाने पर भी जोर दिया गया। शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों को जम्मू-कश्मीर की तर्ज पर डिजिटल निरीक्षण व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए। इसके तहत जिला एवं राज्य स्तर के अधिकारी व्हाट्सएप वीडियो कॉल, गूगल मीट और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से विद्यालयों की गतिविधियों की निगरानी कर सकेंगे। इससे दूरदराज क्षेत्रों के स्कूलों का निरीक्षण अधिक नियमित और प्रभावी हो सकेगा।