संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम में भारतीय नववर्ष के उपलक्ष्य में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। साध्वी राधिका भारती ने भारतीय नववर्ष से जुड़े कई गूढ़ एवं पुरातन तथ्यों के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को भारतीय नववर्ष मनाया जाता है, जो आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक रूप से पूर्णत: प्रमाणित है ।
साध्वी ने बताया कि ब्रह्मा जी ने सृष्टि का शुभारंभ इसी तिथि को किया था। भगवान श्री राम एवं धर्मराज युधिष्ठिर का राज्य अभिषेक भी भारतीय नववर्ष तको ही किया गया था। आदि शक्ति मां भवानी का प्रथम पूजनीय दिवस भी इसी दिन को माना जाता है। इसीलिए प्रतिपदा तिथि से ही चैत्र के नवरात्र भी शुरू होते हैं।
उन्होंने कहा कि युवा देश का भविष्य हैं। उन्हें भारतीय संस्कृति के मूल से फिर जुड़ना होगा ताकि वे अपनी इस भारतीय संस्कृति में छिपे रत्नों की चमक से अपने जीवन को भी प्रकाशित कर पाएं। कोई वृक्ष अपने मूल से टूट कर फल प्रदान नहीं कर सकता। आज अध्यात्म पोषित करने वाली भारत भूमि पर रहने वाला भारतीय अपने मूल आधार से टूट चुका है।
उन्होंने कहा कि भारत भूमि के महान आदर्श एवं इसकी आध्यात्म पोषित संस्कृति के कारण ही भारत को सदा से विश्व गुरु की संज्ञा दी जाती रही है और इतिहास साक्षी है कि स्वामी विवेकानन्द, योगानंद परमहंस जैसे हमारे संतों महात्माओं ने समय समय पर विश्व के कोने-कोने में जाकर अध्यात्म की अलख जगाकर संपूर्ण मानवता के लिए देवत्व की राह प्रशस्त की है।
साध्वी ने कहा कि संपूर्ण मानवता को आज पुन: अपने मूल से जुड़ने की आवश्यकता है। तभी प्रत्येक मानव भौतिक, मानसिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक रूप से संपन्न हो पाएगा। भारत देश विश्व स्तर की सोच रखता हुआ संपूर्ण मानव जाति के कल्याण हेतु अपने मूल्यों एवं ज्ञान का प्रचार प्रसार करता रहा है। इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ जिला परिषद चेयरमेन रमेश ठसका व सुरेशु भूरा मोहड़ी ने संयुक्त रूप से किया।