संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। एसएस जैन सभा मॉडल टाउन के प्रांगण में चल रहे चातुर्मास के 13वें दिन साध्वी समीक्षा ने भजन के माध्यम से फरमाया कि मेरी आत्मा हो, तुम परमात्मा हो, तुम मेरे कण-कण में प्रभु बस जाना, मृत्यु तो आनी है फिर काहे का डरना। एक पल का विश्राम है फिर तेरी शरणा। उन्होंने विस्तार से 12 तरह की अनुपेक्षा भावनाओं की व्याख्या की। जिसमें सबसे पहले भावना है।
अनित्य भावना इसके बारे में विस्तार से बताते हुए उन्होंने कहा कि नित्य, प्रतिदिन होने वाला और अनित्य मतलब स्थाई। आत्मा की मोक्ष की प्राप्ति के लिए यदि हम नित्य प्रति की आदतें नहीं बदलते हैं तो हम यहां से बुरे कर्मों का पिटारा लेकर ही जाएंगे। साध्वी ने बताया कि नंदी सूत्र में 14 प्रकार के श्रोता होते हैं पर मूलतः तीन प्रकार के श्रोता होते हैं।
एक श्रोता पत्थर के समान होता है जिस पर पानी की बूंद गिरती है और उस पर कोई फर्क नहीं पड़ता, फिसल कर गिर जाती है। दूसरा श्रोता कपड़े के समान होता है। पानी में गीला तो जरूर होता है, लेकिन निचोड़ कर जब सूखने के लिए डालते हैं तो कुछ ही देर में सूख जाता है।
मतलब उस पर सत्संग का असर कुछ देर तक ही रहता है और तीसरा श्रोता धरती की तरह होता है पानी की बूंद पड़ती है मिट्टी उसे सोख लेती है और फिर किसान को बदले में उपजाऊ फसल देती है। मतलब इस प्रकार का श्रोत सत्संग का श्रवण भी करता है, जीवन में अमल भी करता ह। वह अपना व समाज का भला करने के लिए तत्पर रहता है।