जगाधरी से होकर अंबाला की ओर जा रही कोयले से भरी मालगाड़ी के करीब 15 डिब्बे बराड़ा के तंदवाल में पुल टूटने से मारकंडा नदी में जा गिरे। दोपहर करीब दो बजे हुए हादसे के बाद सहारनपुर-अंबाला रेल मार्ग पूरी तरह बंद हो गया। इससे यमुनानगर-जगाधरी रेलवे स्टेशन समेत साथ लगते छोटे स्टेशनों पर सहारनपुर व अंबाला से कोई भी ट्रेन नहीं आ पाई। रेलवे की ओर से उक्त रेल मार्ग से निकलने वाली करीब 15 ट्रेनों को रद कर दिया गया। जबकि दर्जनों ट्रेनों को अंबाला व सहारनपुर से रूट बदलकर चलाया गया। अंबाला से सहारनपुर के बीच रेल मार्ग पर लगते स्टेशनों पर दोपहर दो बजे से रात नौ बजे तक यात्री ट्रेनों के लिए भटकते रहे। इस बीच सबसे अधिक परेशानी दैनिक रेल यात्रियों के अलावा रिजर्वेशन करवा चुके यात्रियों को झेलनी पड़ी, चूंकि उन्हें अपनी गाडिय़ों को पकड़ने के लिए अंबाला व सहारनपुर जाना पड़ा।
ये गाडिय़ां हुई रद
रेलवे की ओर से अंबाला-सहारनपुर रेल मार्ग से होकर गुजरने वाली छोटे रूट की 15 से अधिक पैसेंजर व एक्सप्रेस ट्रेनों को रद कर दिया गया। इनमें 54542 अंबाला-मेरठ पैसेंजर, 54540 अंबाला दिल्ली पैसेंजर, 64504 अंबाला-सहारनुपर पैसेंजर, 04922 अंबाला-सहारनपुर पैसेंजर, 64513 सहारनपुर-नंगलडैम, 64501 सहारनपुर-अंबाला, 64512 नंगलडैम पैसेंजर, 14632 अमृतसर-देहरादून एक्सप्रेस, 14610 जम्मू-ऋषिकेश एक्सप्रेस, 14609 ऋषिकेश-जम्मू एक्सप्रेस, 14631 देहरादून-अमृतसर एक्सप्रेस, 12232 चंडीगढ़-लखनऊ एक्सप्रेस, 15012 चंडीगढ़-लखनऊ एक्सप्रेस शामिल हैं।
इनके बदले रूट
हादसे के बाद अंबाला-सहारनपुर रेल मार्ग से होकर गुजरने वाली दर्जनों ट्रेनों के रूट बदले गए। इनमें 15012 अमृतसर-दरभंगा जननायक एक्सप्रेस, 14521 दिल्ली-अंबाला एक्सप्रेस, 13255 चंडीगढ़-पाटलीपुत्र एक्सप्रेस, 14681 दिल्ली-जालंधर एक्सप्रेस, 15211 दरभंगा-अमृतसर जननायक एक्सपे्रस, 13152 जम्मू-कलकत्ता एक्सप्रेस, 13151 कलकता-जम्मू एक्सप्रेस, 14645 दिल्ली-जम्मू शालीमार एक्सप्रेस, 12332 हावड़ा जम्मू मेल, 13307/8 धनबाद-फिरोजपुर-धनबाद गंगा सतलुज एक्सप्रेस, 18237/38 बिलासपुर-अमृतसर-बिलासपुर छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस, 13050 अमृतसर हावाड़ा एक्सप्रेस, 13006 हावाड़ा अमृतसर मेल के अलावा दर्जनों ट्रेनें शामिल हैं।
गर्मी में यात्रियों के छूटे पसीने, रात तक नहीं आई ट्रेनें
रेल हादसे के बाद यमुनानगर-जगाधरी रेलवे स्टेशन सहित अंबाला-सहारनपुर रेल मार्ग पर लगने वाले अन्य स्टेशनों पर काफी संख्या में यात्री गाडिय़ों के चलने का घंटों इंतजार करते रहे। गर्मी के मारे उनके पसीने छूटते दिखे। सबसे अधिक परेशानी दैनिक रेल यात्रियों को हुई, जो नौकरी, पढ़ाई व अन्य कामकाज के लिए ट्रेनों पर सुबह बाहर गए थे, लेकिन वापसी में ट्रेनें न चलने से उन्हें अन्य साधना का सहारा लेते हुए लौटना पड़ा।
रिजर्वेशन वाले यात्रियों को जाना पड़ा अंबाला-सहारनपुर
पहले से यमुनानगर-जगाधरी समेत अंबाला-सहारनपुर रेल मार्ग पर लगने वाले अन्य स्टेशनों से ट्रेनों में रिजर्वेशन करवा चुके यात्री रेले हादसे के बाद असमंजस में पड़ गए। अधिकांश यात्री अपने स्टेशनों पर गाड़ी पकडने के लिए आए, किंतु उन्हें ट्रेनों के न चलने का पता चला। इंक्वारी से ट्रेनों के रूट बदलने की बात सुन कई यात्रियों के टिकट केंसिल कराई। जबकि कईयों को अपनी गाडिय़ों को पकड़ने के लिए अंबाला व सहारनपुर जाना पड़ा। बता दें कि यमुनानगर-जगाधरी स्टेशन से अंबाला की दूरी करीब 65 किलोमीटर है, जबकि सहारनपुर 35 किलोमीटर दूर है। ऐसे में यात्रियों को सड़क मार्ग से बसों व अन्य साधनों का सहारा लेना पड़ा और उनके अधिक धन व समय की बर्बादी हुई।
सहारनपुर के लिए 1500 रुपये में मिली टैक्सी
यमुनानगर-जगाधरी रेलवे स्टेशन पहुंचे यात्री सुभाष गुप्ता ने बताया कि उन्होंने चंडीगढ़-पाटलीपुत्र एक्सप्रेस से बनारस जाना था। सोचा था कि यमुनानगर-जगाधरी रेलवे स्टेशन से ट्रेन लेकर सहारनपुर चले जाएंगे, लेकिन यहां पहुंचने पर सभी ट्रेनों के रद होने का पता चला। ऐसे में उन्होंने 1500 रुपये में टैक्सी हायर की है, जो उन्हें सहारनपुर छोड़ेगी।
सहारनपुर लौटने को नहीं मिला कोई साधन
सहारनपुर के शाहदाब ने बताया कि वह यमुनानगर आए थे, देर शाम वापस लौटना था। जब वह स्टेशन पर पहुंचे तो उन्हें ट्रेनों के रद होना का पता चला। ऐसे में बाहर से उन्हें कोई अन्य साधन नहीं मिला, जिससे वह सहारनपुर जा सके।
यमुनानगर में ही गुजारनी पड़ेगी रात
सहारनपुर के विशाल ने बताया कि वह अपने अंकल की दुकान पर घरेलू काम से आया था। लेकिन यहां से ट्रेनें न चलने के कारण वह घर नहीं लौट पाया। अब उसे यमुनानगर में ही रात गुजारनी पड़ेगी।
न आई ट्रेन, न ही हुआ टिकट वापस
बिहार के सहरसा निवासी नीरज, संजय, मनीष, धनबग्गा, विपिन, सींटू ने बताया कि वह करीब दो बजे स्टेशन पर पहुंचे थे। सूचना पट्ट पर अमृतसर-सहरसा जनसेवा एक्सप्रेस के तीन बजे आने के संकेत थे। पूछताछ के बाद उन्होंने टिकट बनवाया, लेकिन कुछ देर बाद पता किया तो ट्रेन के अधिक लेट होने की सूचना मिली। इस पर वह स्टेशन पर इंतजार करने लगे और काफी देर बाद लोगों को बात करते सुना कि ट्रेनें तो कैंसिल हैं। जब उन्होंने पूछताछ की तो स्थिति का पता चला, जिस पर वह काउंटर पर टिकट वापस करने पहुंचे तो टिकट वापस नहीं हुई। यात्रियों ने कहा कि ट्रेनों के अनिश्चतकालीन विलंब के कारण अब वह जाना नहीं चाहते हैं, लेकिन टिकट कलर्क उनकी टिकट वापस ही नहीं कर रहा है।