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43 राजकीय प्राइमरी स्कूलों में 50 से भी कम बच्चे

Tue, 23 Aug 2016 11:30 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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कुछ इस तरह पढ़ाई करते बच्चे।
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 विद्यार्थियों की घटती संख्या के कारण क्षेत्र में 75 प्राइमरी स्कूलों में से कई स्कूल बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। इन स्कूलों में कुछेक बच्चे ही पढ़ने आ रहे हैं। प्राइमरी स्कूल धानुपुरा, खेड़ी लक्खासिंह में मात्र 11-11 बच्चे पढ़ रहे हैं। वहीं, सतगौली में 14 और सिलीकलां, अमलोहा में 17-17 बच्चे पढ़ने आ रहे हैं।
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ब्लॉक में इस समय 20 से कम बच्चों वाले स्कूलों में मारूपुर 20, खेडकी ब्रह्ममणा 18, भागुमाजरा 19 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। ब्लॉक रादौर में 2007 तक प्राइमरी स्कूल मेन बाजार रादौर ब्लॉक का सबसे बड़ा स्कूल हुआ करता था। उस समय स्कूल में 560 बच्चे शिक्षा ग्रहण करते थे, किंतु आज ब्लॉक के इस स्कूल में मात्र 202 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इनमें 84 एससी समाज से और 96 बीसी से हैं। स्कूल में सामान्य वर्ग के मात्र दो बच्चे ही शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। प्राइमरी स्कूल रादौर आज बच्चों की संख्या के मामले में पहले स्थान से चौथे स्थान पर पहुंच गया है।

रादौर में दस स्कूलों में बच्चों की संख्या 100 से अधिक
रादौर क्षेत्र में दस प्राइमरी स्कूल ही ऐसे हैं, जिनमें 100 से अधिक बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। सबसे अधिक 277 बच्चे प्राइमरी स्कूल छोटाबांस में हैं। उन्हेडी स्कूल में 249 बच्चे और जठलाना में 207 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। रादौर स्कूल में 202, घिलौर में 172, नाचरौन में 166, अलाहर में 152, गुमथला में 146 बच्चे, जुब्बल में 101 और खुर्दबन प्राइमरी स्कूल में 100 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। 75 प्राइमरी स्कूलों में से 32 स्कूल ही ऐसे हैं, जिनमें 50 से 277 के बीच बच्चों की संख्या है। क्षेत्र के 43 स्कूलों में 50 से भी कम बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
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कई स्कूल हो सकते हैं बंद
ब्लॉक रादौर में हर वर्ष घटती बच्चों की संख्या के कारण कई प्राइमरी स्कूल बंद होने के कगार पर चले गए हैं। हर वर्ष सभी स्कूलों में बच्चों की संख्या में लगातार गिरावट हो रही है। इससे कई स्कूलों का अस्तित्व खत्म होने जा रहा है वहीं, रादौर और आसपास के गांवों में चल रहे प्राइवेट स्कूलों में हर वर्ष बच्चों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है।

वर्जन
प्राइमरी स्कूलों में बच्चों की घटती संख्या चिंता का विषय है। इससे कई स्कूल बंद होने को हैं। प्राइवेट स्कूलों की ओर अभिभावकों का रुझान ज्यादा है। सरकार प्राइमरी स्कूलों में बच्चों को अधिक से अधिक सुविधाएं दे रही है, बावजूद इसके हर वर्ष बच्चों की संख्या बढ़ने की बजाए कम होती जा रही है। बच्चों की संख्या बढ़ाने को लेकर कड़े कदम उठाए जाएंगे।
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धर्मेंद्र सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी, रादौर।
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