फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

लाखों के सामान की नहीं कोई देखरेख, पशुबाडे़ में पहुंच रहे डस्टबिन

Sun, 23 Apr 2017 11:53 PM IST
yamunanagar beuro
विज्ञापन
g - फोटो : yamunanagar
विज्ञापन
स्वच्छ भारत स्वच्छ हरियाणा योजना के नाम पर क्षेत्र की कई पंचायतों में सरकारी पैसे का दुरुपयोग हो रहा है। पंचायतों में नियमों को ताक पर रख कर डस्टबिन व अन्य सामान की खरीद की जा रही है। यहां तक कि देखने में यह भी आया है कि फर्म का बिल पास करवाए बिना ही पंचायत फंड से भुगतान कर दिया गया। लाखों रुपये खर्च कर खरीदे गए इन डस्टबिन व अन्य सामान की देखरेख भी नहीं हो रही है।
विज्ञापन

सूत्रों के अनुसार डस्टबिन पर 1150 रुपए की लागत आती है, लेकिन पंचायत फंड से लगभग 3500 रुपए से 4000 तक के आधार पर पेमेंट हुई है। छछरौली ब्लाक की शायद ही ऐसी कोई पंचायत बची हो जहां डस्टबिन ना लगाए गए हों। सरकार द्वारा डस्टबिन की कोई कीमत निर्धारित नही की गई। बस, इसी का फायदा कुछ निजी फर्म उठा रही हैं। सरकारी इस्टीमेट में 18 गेज की चादर का डस्टबिन बनाने का प्रस्ताव मंजूर किया गया था। लेकिन बिना प्रस्ताव के 22 गेज की चादर तथा 70 किलोग्राम वजन से भी कम डस्टबिन पंचायतों में भिजवाए गए हैं।

 
नालियों और पशुबाडे़ में पहुंच रहे डस्टबिन
ब्लॉक में डस्टबिन आने के बाद पंचायत इनकी ओर ध्यान भी नहीं दे रही है। पंचायत ने एक बार डस्टबिन रखवा दिया और फिर इसकी ओर ध्यान नहीं दिया। हद तक तो ये है कि अधिकतर ये डस्टबिन गांव की नालियों व पशु बाड़े तक पहुंच गए हैं। कई लोग इन्हें उठा कर घर ले गए और इनमें पशुओं को चारा खिला रहे हैं।  
विज्ञापन

 
नियम कायदे ताक पर
सरकारी व पंचायत के सामान में खरीद करने के कुछ नियम कायदे हैं, लेकिन डस्टबिन की इन खरीद में नियम कायदों को ताक पर रख दिया गया। सरकारी नियमानुसार यदि पंचायत में स्ट्रीट लाइट, बैंच, डस्टबिन या अन्य कोई सामान खरीदना है तो पहले कुटेशन तैयार ली जाती है। जिस फर्म का रेट कम होता है, उसका पंचायत में प्रस्ताव पारित किया जाता है। फिर ये प्रस्ताव कार्यवाही के लिए सचिव के पास जाता है। सचिव की ओर से खरीद के आगे की कार्रवाई की जाती है। उसके बाद पंचायत में सामान भेजा जाता है या फिर गांव में लगाया जाता है। जिसके बाद ही पेमेंट का चैक कटता है और बैंक के माध्यम से फर्म को भुगतान दिया जाता है। लेकिन कई पंचायतों में पहले चैक काट कर दे दिया गया और पेमेंट के बाद पंचायत में सामान पहुंचा है। इसके अलावा कई पंचायतों में पेमेंट कर दी गई, लेकिन दो दो महीने बाद सामान भी नहीं पहुंचा है।  

 
गांव में लगाए गए डस्टबिन की अव्यवस्था के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। यदि ऐसा है तो संबंधित बीडीपीओ को भेजकर जांच कराई जाएगी। जहां तक डस्टबिन के पंचायत फंड से भुगतान की बात है, इस संबंध में भी बीडीपीओ से जांच कराई जाएगी।
विज्ञापन

गगनदीप सिंह, डीडीपीओ, यमुनानगर।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें