हुडा सेक्टरों के नगर निगम में शामिल होने के बाद निगम प्रशासन हुडा वासियों को पिछले छह सालों का प्रापर्टी टैक्स जमा करने का नोटिस भेज रहा है। इसको लेकर हुडा सेक्टर 17 के बाशिंदों और नगर निगम प्रशासन आमने-सामने हैं। हुडा वेलफेयर एसोसिएशन इसके खिलाफ कोर्ट पहुंच गई है।
प्रदेश सरकार द्वारा हुडा के बसाए सेक्टरों को नगर निगम में शामिल किया गया है। इसके तहत जगाधरी के सेक्टर 17, एक ए और सेक्टर 18 का ए पार्ट नगर निगम में आ गया है। सेक्टर 17 ए में करीब तीन हजार और सेक्टर 18 ए में करीब 250 मकान हैं। नगर निगम की ओर से दोनों सेक्टरों के भवन मालिकों को वर्ष 2010 से प्रापर्टी टैक्स जमा करने के नोटिस भेजे जा रहे हैं। सेक्टर 17 के लोग इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि हुडा को नगर निगम में शामिल करने का फैसला हाल ही में लिया गया है। इसलिए जब से हुडा नगर निगम में शामिल किया गया है, तब से हाउस टैक्स लेना चाहिए। दूसरी तरफ निगम प्रशासन का कहना है कि नगर निगम वर्ष 2010 में बना था इसलिए हाउस टैक्स उसी साल से लिया जाएगा।
पहले का टैक्स क्यों दें : एसोसिएशन
हुडा वेलफेयर एसोसिएशन के प्रेजीडेंट डॉ विजय गोडियान ने बताया कि करीब 17 साल पहले तत्कालीन नगर परिषद की ओर से हुडा सेक्टर 17 के निवासियों से हाउस टैक्स लेने के लिए नोटिस भेजे थे। एसोसिएशन ने इसे कोर्ट में चैलेंज किया था। कोर्ट ने एसोसिएशन के हक में फैसला सुनाया था। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि फिलहाल सेक्टर 17 में मूलभूत सुविधाएं हुडा की ओर से उपलब्ध कराई जाती हैं, इसलिए जब तक सेक्टर 17 नगर परिषद में शामिल नहीं होता, तब तक हाउस टैक्स नहीं ले सकता। अब सेक्टर 17 नगर निगम में शामिल हो गया है तो हम प्रापर्टी टैक्स देने को तैयार हैं, लेकिन टैक्स सेक्टर 17 के नगर निगम में शामिल होने के बाद से लिया जाए न कि जब नगर निगम बनने के समय से। गोडियान ने बताया कि नगर निगम द्वारा प्रॉपर्टी टैक्स के नोटिस दिए जाने पर एसोसिएशन ने इसके खिलाफ कोर्ट में अपील कर दी है।
ये है टैक्स के रेट
नगर निगम के मुताबिक 300 गज तक प्लाट के लिए प्रति गज 75 पैसे, 301 से 500 गत तक तीन रुपये प्रति गज तथा 501 गज से अधिक लैंड पर साढे़ चार रुपये प्रति गज हाउस टैक्स निर्धारित है।