एनएचएम के अंतर्गत शुरू हुए मदर्स अबसोल्यूट अफैक्शन (मां) कार्यक्रम के तहत नौनिहालों के लिए मां के नाम चार संदेश हर जिलावासी तक पहुंचेंगे। पूरी कवायद नौनिहालों का स्वास्थ्य सुधारने के लिए है। इसमें नौनिहालों को स्तनपान कराने पर स्वास्थ्य विभाग का जोर रहेगा।
कार्यक्रम को लेकर मंगलवार को सिविल सर्जन डॉ. सतीश गुप्ता, डॉ. रमेश कुमार, उप सिविल सर्जन (प्रतिरक्षण) डॉ. दिव्या मंगला, मुख्यमंत्री के सुशासन सहयोगी जश्नजीत सिंह और डॉ. शिवानी गुप्ता की अध्यक्षता में सिविल अस्पताल में कार्यशाला हुई। इसमें जिले के सभी चिकित्सा अधीक्षक, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों और स्वास्थ्य केंद्रों की इंचार्जों ने हिस्सा लिया। डॉ. दिव्या मंगला ने बताया कि मां कार्यक्रम के चार महत्वपूर्ण संदेशों को हर जिलावासी तक पहुंचाना है। इनमें बच्चा पैदा होने के एक घंटे के अंदर बच्चे को मां का पहला पीला गाढ़ा दूध देना आवश्यक है। छह माह तक बच्चे को केवल मां का दूध ही देना और साथ अन्य आहार देना और दो साल तक की आयु तक मां का दूध बच्चे को अवश्य पिलाना शामिल है। उन्होंने बताया कि पहले छह माह तक यदि शिशु केवल मां के दूध पर निर्भर है तो दस्त और निमोनिया के कारण बच्चे की मृत्यु दर को 11 गुणा और 15 गुणा घटाया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि मां कार्यक्रम की सफलता के लिए भारत सरकार द्वारा 3.9 करोड़ गर्भवती और दूध पिलाती माताओं को 8.8 लाख आशा वर्करों तथा अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा जागरूक किया जाएगा। 18 हजार प्रसव सुविधा केंद्रों पर कुशल कर्मियों द्वारा स्तनपान बारे प्रबंधन किया जाएगा। सभी स्वास्थ्य संस्थाओं व केंद्रों में महिला कर्मचारियों व स्वास्थ्य जांच हेतु आने वाली महिलाओं के स्तनपान कक्ष बनाने का प्रावधान किया जाएगा, ताकि स्तनपान हेतु उचित व्यवस्था प्रदान की जा सके।