माडर्न कॉलोनी निवासी एक महिला शुक्रवार को लघु सचिवालय प्रांगण में अपनी दस वर्षीय बेटी के साथ धरने पर बैठ गई।
लगभग आधा घंटा तक कोई सुनवाई न होते देख महिला व उसकी बेटी विलाप करने लगी। महिला के विलाप करने की सूचना पर एसपी डॉ. अरुण नेहरा तुरंत महिला के पास आए और उसकी लिखित में शिकायत ली।
महिला का आरोप है कि ससुराल पक्ष के लोग जबरन उससे गलत काम करवाने का दबाव देने रहे है, उसके मना करने पर आरोपियों ने उसे घर से निकाल दिया। एसपी ने मामले की जांच कर तुरंत कार्रवाई करने का महिला का आश्वासन दिया।
पीड़ित महिला सोनिया अरोड़ा ने एसपी को दी शिकायत में बताया कि 11 जुलाई 1993 को उसका विवाह माडर्न कॉलोनी निवासी व्यक्ति के साथ हुआ था। शादी से उसके पास 20 वर्षीय लड़का कार्तिक और 10 वर्षीय बेटी प्रियांशी है।
उसका पति शारीरिक रूप से निशक्त है। महिला का आरोप है कि निशक्त होने के बावजूद उसका पति अपनी छडी से उसे पीटता है और बात बात पर झगड़े करता है। अब अन्य ससुराल पक्ष के लोग भी उसके साथ उससे मारपीट करते है। जब भी वह उसके खिलाफ आवाज उठाने का प्रयास करती है तो उसका पति उसे ब्लैकमेल करता है।
उसके पति ने डेढ़ साल से उसे खर्चा देना बंद कर रखा है। जिस पर उसने घर का खर्च चलाने के लिए अपने घर में ही महिलाओं का सामान बेचने की दुकान की हुई है। महिला ने बताया कि 17 अगस्त को भी उसके पति ने ससुराल पक्ष के अन्य लोगों व पड़ोसियों के साथ मिलकर उस पर हमला कर दिया। उसने अपनी दुकान में घुसकर जान बचाई।
लेकिन उसके बाद भी आरोपियों ने दुकान में घुसकर उसके व उसकी बेटी के साथ मारपीट की। आरोप है कि उसकी दुकान के गल्ले से आरोपियों ने 19 हजार रुपये चोरी कर लिए और वहां से भाग गए। इसके बाद उसके पति ने अपनी छड़ी से फिर उसकी पिटाई गई।
गुरुवार शाम करीब साढ़े पांच बजे उसके पति ने उसके साथ फिर से मार-पिटाई शुरू कर दी। आरोप है कि इस दौरान आरोपी ने उसे गलत काम करने को बोला, लेकिन उसने इसका विरोध किया तो उसे मारपीट कर घर से निकाल दिया।
महिला का कहना है कि उसके बाद उसके ससुराल वालों ने उसकी दुकान पर भी ताला लगा दिया और उसे धक्का देकर घर से बाहर निकाल दिया। पूरी रात वह अपनी बेटी के साथ सड़क पर रही। सुबह होते ही लघु सचिवालय पहुंच गई। महिला की मांग है कि आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कर उसे उसका घर दिलाकर उसे इंसाफ दिलाया जाए।
महिला ने बताया कि उसकी बेटी शहर के निजी स्कूल में पांचवीं कक्षा में पढ़ती है। वह अपनी बेटी की शिक्षा का पूरा खर्च स्वयं उठा रही है। सितंबर माह में उसकी बेटी की परीक्षाएं शुरू है और ऐसे में वह सड़कों पर धक्के खाने को मजबूर है। इससे उसकी बेटी की पढ़ाई खराब हो रही है।
महिला शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे लघु सचिवालय में आ गई और सचिवालय प्रांगण में अपनी दस वर्षीय बेटी के साथ धरने पर बैठ गई। लेकिन काफी देर तक महिला की तरफ किसी का ध्यान नहीं गया। महिला दो बैग लेकर धरने पर बैठी हुई थी।
लगभग आधा घंटा तक जब कोई अधिकारी उसके पास नहीं पहुंचा तो महिला सचिवालय के मुख्य गेट के नजदीक आकर बैठ गई और विलाप करने लगी। कुछ ही देर में लोगों की भीड़ लग गई। सूचना मिलने पर एसपी डा. अरुण नेहरा महिला की शिकायत लेने के लिए उसके पास आए और उसकी शिकायत लेकर जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया।