जिले को अब पर्यटन हब के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके तहत आदिबद्री क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने के साथ छह अन्य पर्यटन स्थलों के विकास के लिए प्रोजेक्ट शुरू किए जाएंगे। इनमें हथिनी कुंड बैराज, चनेटी बौद्ध स्तूप, सिखों की पहली राजधानी लोहगढ़, कलेसर नेशनल पार्क, वाइल्ड लाइफ सेंचुरी और चौ. देवीलाल हर्बल पार्क के नाम शामिल हैं।
पर्यटन विभाग ने इन जगहों को पर्यटक फ्रेंडली बनाने की स्वीकृति दे दी है। अब यहां पर पर्यटकों की सुविधा के लिए खान पान, ठहरने का स्थान और अन्य गतिविधियां विकसित की जाएंगी। पर्यटकों को लुभाने के लिए इन पर्यटन स्थलों के बारे में विभाग की तरफ से प्रचार भी किया जाएगा।
आदिबद्री: सरस्वती नदी को धरा पर लाने के लिए प्रदेश सरकार प्रोजेक्ट चला रही है। पहाड़ों के बीच में स्थित सरस्वती नदी के उद्गम स्थल को पहले ही विकसित किया जा चुका है। सरस्वती नदी की खुदाई के दौरान जमीन से जल निकलने के बाद विश्व भर का ध्यान इस ओर गया। यहां पर्यटन विभाग ने ठहरने के लिए टूरिस्ट कांप्लैक्स बनाया है। इसके अलावा खानपान की व्यवस्था भी की गई है।
हथिनीकुंड बैराज: यमुना पर बने एतिहासिक बैराज को देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं, लेकिन अभी तक पर्यटकों की सुविधा के लिए यहां कोई साधन उपलब्ध नहीं है। बैराज के पास पार्क और रिवरफ्रंट विकसित किया जाएगा। पर्यटन विभाग की तरफ से बैराज से कुछ कदम दूर कैफेटेरिया का निर्माण भी किया है। यहां खानपान के अलावा पिकनिक, जन्मदिन, शादी की सालगिरह आदि कार्यक्रम भी आयोजित किए जा सकेंगे।
लोहगढ़ : सिख साम्राज्य की पहली राजधानी लोहगढ़ में स्थित बाबा बंदा सिंह बहादुर से जुड़े किले का पुर्नउद्धार किया जाएगा। बाबा बंदा सिंह बहादुर की याद में यहां प्रदेश का सबसे आकर्षक स्मारक भी बनाया जाएगा। लोहगढ़, आदिबद्री व हरिपुर के कुंडों में हिमाचल प्रदेश के सहयोग से बांध बनेंगे। इसके अलावा क्षेत्र के नवदुर्गा शक्तिपीठ देवी मंदिर को विकसित किया जाएगा।
कलेसर नेशनल पार्क-हिमालय की शिवालिक पहाड़ियों में स्थित कलेसर नेशनल पार्क खूबसूरत पर्यटन स्थल है। इसकी सीमा तीन राज्यों हिमाचल, उत्तराखंड और उत्तरप्रदेश से लगी हुई है। 8 दिसंबर 2003 को पार्क का क्षेत्र 11570 एकड़ होने पर इसे राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया था। नेशनल पार्क जैव विविधता गुफाओं के साथ वन, खैर के जंगलों और घास भूमि से भरा हुआ है। जो पौधों से लेकर जानवरों तक की प्रजातियों के लिए एकदम अनुकूल है। यमुनानगर में ही जंगल सफारी की इजाजत है।
वाइल्ड लाइफ सेंचुरी-यहां हाथी, तेंदुआ, शाकाहारी सांभर, चीतल, बार्किंग डीयर, गोरल, हिरण, नीलगाय, नीलबैल, जंगली सुअर, दुर्लभ प्रजाति के बंदर, किंग कोबरा, मॉनिटर छिपकली, घोरल, अजगर और कभी-कभार राजाजी नेशनल पार्क से आए बाघ भी देखने को मिल जाते हैं।
हर्बल पार्क- चुहड़पुर कलां स्थित हर्बल नेचर पार्क में 184 एकड़ में जड़ी बूटियां लगी हुई है। इस प्राकृतिक उद्यान में 350 किस्म की दुर्लभ जड़ी बूटियों की कई प्रदेशों में बहुत डिमांड है। यहां पर्यटक हर्बल पार्क का दौरा करने आते हैं और भारी तादाद में अपनी साथ प्राकृतिक जड़ी बूटियां ले जाते हैं।
चनेटी बौद्ध स्तूप-जिला मुख्यालय से करीब 18किमी दूर चनेटी में 2300 वर्ष पूर्व बौद्ध शासक सम्राट अशोक द्वारा ऐतिहासिक विश्व प्रसिद्ध बौद्ध स्तूप बनवाया गया था। यहां पर देश विदेश से पर्यटक आते हैं। यहां पर्यटकों की संख्या बढ़े, इसके लिए यहां बुनियादी सुविधाएं जैसे पार्किंग और एक कम्यूनिटी सेंटर बनवाया जा रहा है।
वर्जन
-पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार यमुनानगर के सभी पर्यटक स्थलों को टूरिस्ट फ्रेंडली बना रही है। पर्यटकों की संख्या बढ़ने से क्षेत्र के युवाओं को रोजगार मिलेगा और आर्थिक प्रगति होगी। इन पर्यटन स्थलों के आसपास के गांवों को विलेज टूरिज्म योजना में भी शामिल कर लिया गया है। जिससे ग्रामीण बाहर से आने वाले पर्यटकों को अपने घरों में ठहरा कर उनकी हरियाणवीं अंदाज में आवभगत कर सकेंगे।
कंवरपाल गुज्जर, पर्यटन मंत्री, हरियाणा