प्रशासन ने 30 जून तक यमुनानदी के अलग अलग घाटों पर पत्थरों से जाल लगाकर स्टड बनाने का कार्य किए जाने के दावे किए गए थे। लेकिन आज तक यमुना नदी के घाटों पर स्टड बनाने का कार्य जारी है। नहरी विभाग की लापरवाही के कारण जठलाना क्षेत्र के यमुनानदी किनारे बसे गांव के लोगों में भारी रोष देखा जा रहा है। मानसून की बरसात जारी है, लेकिन नहरी विभाग का कार्य पूरा होने में काफी समय लगेगा। जिससे यमुना नदी किनारे बसे लोगों को अपने गांव के अस्तित्व की चिंता सताए जा रही है। नहरी विभाग गुमथला घाट पर यमुना किनारे पत्थर डालकर अपना कार्य कर रहा है। जिससे क्षेत्र के लोगों को बाढ़ राहत के नाम पर करोड़ों रुपए के घोटाले किए जाने की आशंका है। जिसको लेकर हरियाणा एंटी क्रप्शन सोसाइटी की ओर से मामले को लेकर सीएम को एक पत्र भेजकर मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाने की मांग की गई है।
यूपी के कार्य बल्ले-बल्ले, हरियाणा के कार्य थल्ले थल्ले:
हर वर्ष सरकार व प्रशासन यमुना नदी की बाढ़ से बचाने के लिए बड़े बड़े दावे करता है। लेकिन होता उसके विपरीत है। गांव संधाला निवासी शिवकुमार कांबोज, वरयाम सिंह गुमथला, वीरभान वधवा, सुरजीत सिंह भुरा, मांगेराम कंडरौली ने बताया कि उत्तरप्रदेश की सरकार अपने किसानों को बाढ़ से बचाने के लिए सर्दियों के दिनों में बाढ़ राहत के कार्य करती है। सर्दियों के दिनों में यमुना नदी सूखी होती है। ऐसे में यमुनानदी पर बाढ़ राहत के कार्य करना आसान होता है। लेकिन हरियाणा में बाढ़ राहत के कार्य मानसून से कुछ महीने पहले शुरू होते हैं। यह कार्य मानसून आने के बाद तक और यमुना में बाढ़ आने के समय तक चलते रहते हैं। जिससे बाढ़ आने पर यमुना नदी किनारे बसे लोगों को अपनी बेशकीमती भुमि व फसलों से हाथ धोना पड़ता है। हर वर्ष बाढ़ राहत के नाम पर नहरी विभाग करोड़ों रुपए खर्च करता है, लेकिन फायदा कोई नहीं होता।
गुमथला, संधाला और लालछप्पर को है सबसे अधिक खतरा
यमुना की बाढ़ से हर वर्ष भूमि कटाव होने के कारण गांव गुमथला, संधाला व लालछप्पर तक यमुना नदी पहुंच चुकी है। इन गांव से मात्र कुछ एकड़ पर यमुना नदी बह रही है। जब भी यमुना में बाढ़ का पानी छोड़ा जाता है तो सबसे ज्यादा खतरा इन गांवों के अस्तित्व को होता है। गांव गुमथला निवासी डॉ. सुदेश बंसल ने बताया कि हर वर्ष भूमि कटाव होने से यमुना नदी गांव की ओर बढ़ रही है। सरकार को इन गांव का अस्तित्व बचाने के लिए यमुना नदी पर पक्की पटरी बनानी चाहिए। यदि जल्द पक्की पटरी नहीं बनाई गई तो इन गांव का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी यमुना नदी की बाढ के कारण जठलाना क्षेत्र के कई गांव उजड चुके हैं। जिनमें गांव करहेड़ा भी शामिल है। जिसे 1964 में सरकार द्वारा यमुना की बाढ़ से उजड़ने के बाद माडल टाऊन करहेड़ा के नाम से बसाया गया था। इसी प्रकार कई गांव यमुना की बाढ़ से पूरी तरह उजड़चुके हैं। जिन गांवों का नाम केवल राजस्व विभाग के रिकार्ड में ही मिलता है। जिनमें नगला रांगडान, नगली, प्रहलादपुर, करहेडा, बुंचा बांस, नकुंभ, रामगढ़, माजरी गांव शामिल हैं।