गर्मी सीजन के चलते करीब 11000 एकड़ में फैले कलेसर नेशनल पार्क में आगजनी की घटनाओं से बचने का कोई इंतजाम नहीं है। बीते वर्षों इन दिनों जंगल में हुई आगजनी की घटनाओं को मद्देनजर रख वन विभाग द्वारा जंगलों में फायर लाइनों व सड़कों के किनारे की सफाई नहीं कराई गई है। ऐसे में जगह-जगह सूखे पत्तों में एक चिंगारी भी भीषण आग का रूप ले सकती है।ं
विभागीय सूत्रों की मानें तो 15 मार्च से 20 जून तक फायर सीजन रहता है। इस दौरान जंगल में आग लगने जैसी घटनाएं बढ़ जाती हैं। इनमें वन संपदा समेत वन्य जीव-जंतुओं को भी क्षति पहुंचती है। गर्मी के सीजन में जंगल में आग लगना आम बात है, लेकिन जंगल में लगी आग से निपटने के लिए जंगल में बनी फायर लाइनें कारगर साबित होती हैं। सीजन में अब से पहले जंगल में आग ने दो बार भयंकर रूप दिखा भी दिया है, लेकिन इससे भी विभाग कोई सीख नहीं ले रहा है।
कलेसर नेशनल पार्क में फायर लाइनों की साफ सफाई के लिए लगभग 52 किलोमीटर का एरिया है, जोकि कलेसर विश्राम गृह से कलेसर गांव, ममदूबास, लालढांग और जंगल के बीच में बनी सभी फायर लाइनें, जिनमें 20 फुटी, 100 फुटी जंगल के पास लगते सभी सड़क किनारे आदि शामिल हैं। लगभग पांच साल पहले दूसरे राज्य के जंगल से आई आग ने कलेसर जंगल में भारी तबाही मचाई थी और सैकड़ों वन्य जीव भी आग में जलकर भस्म हो गए थे। उस समय यदि फायर लाइनों की साफ-सफाई नही की होती तो जंगल की आग और अधिक विकराल रूप धारण कर सकती थी।
जंगल की जीवन रेखा होती है फायर लाइन
जंगल में बनी फायर लाइन जंगल की जीवन रेखा होती है। इसकी सफाई न होने से लाइन में पड़े सूखे पत्ते बारूद का काम करते हैं। आग को बुझा पाना तो दूर काबू भी नहीं पाया जा सकता है। घने जंगल के अंदर बीच में लगभग 20 से 50 फुट चौड़ा एक रास्ता बना होता है, जिसे फायर लाइन कहते हैं। इससे यदि जंगल के किसी हिस्से में किसी कारणवश आग लग जाए तो फायर लाइन की वजह से आग जंगल के दूसरे हिस्से में प्रवेश नहीं कर सकती है। यदि भयानक आग लग भी जाए तो वन कर्मी को इतना समय मिल जाता है कि आग पर काबू पाया जा सके। अन्य राज्यों के जंगलों में लगने वाली आग से भी फायर लाइन ही जंगल को सुरक्षित रखती है। इसके लिए समय-समय पर जंगल की फायर लाइन की साफ-सफाई होती रहनी चाहिए। कम से कम फायर सीजन के दौरान इसकी सफाई जरूरी है, लेकिन इस बार विभाग की ओर से इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
नहीं आया साफ-सफाई के लिए कोई बजट
जंगल की फायर लाइनों की साफ सफाई करने का बजट विभाग में हर साल आता है और मजदूरों द्वारा फायर लाइनों की साफ-सफाई कराई जाती है। सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार इस बार विभाग से फायर लाइनों की साफ-सफाई के लिए कोई बजट नहीं आया। इसका खामियाजा जंगली जानवरों को भुगतना पड़ सकता है। बीते वर्ष करीब छह लाख रुपये फायर लाइनों की साफ सफाई के लिए बजट आया था, लेकिन इस बार कुछ भी बजट साफ सफाई के लिए नहीं आया। इस बारे में जब वन राजिक अधिकारी कुलदीप सिंह ने कहा कि इस बार विभाग की ओर से उनके पास फायर लाइनों की सफाई के लिए बजट नहीं आया है। यदि बजट आता तो फायर लाइनों की सफाई समय से पहले करवा दी जाती।
फायर लाइनों की सफाई करना वन विभाग का काम है और रही बात गजलर और टैंकों में पानी भरने की तो जल्द ही गजलरों और टैंकों में पानी भरवा दिया जाएगा।
शिव सिंह, डीएफओ, वन्य प्राणी विभाग।
अभी फायर लाइनों की सफाई के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाने वाली है और टेंडर होते ही फायर लाइनों की सफाई का कार्य करवा दिया जाएगा। वन्य प्राणी विभाग और वन विभाग दोनों मिलकर इस कार्य को पूरा करेंगे।
निवेदिता, जिला वन अधिकारी।