केंद्र की भाजपा सरकार बुधवार को अपना तीसरा रेल बजट पेश कर रही है। हर बार की तरह लोगों को बजट में क्षेत्र के लिए रेलवे से जुड़ी कई सौगातें मिलने की उम्मीद है। अतीत की बात करें तो लोगों को इस बात का भी मलाल है कि चंडीगढ़ रेल लाइन जैसी जिले की कई महत्वपूर्ण रेल परियोजनाएं दशकों से अधर में हैं। दैनिक रेल यात्री संघ की ओर से इस बार मुख्य रूप से रेलवे से नई ट्रेनों के साथ यमुनानगर-जगाधरी रेलवे स्टेशन पर नॉन स्ट्रॉप ट्रेनों के ठहराव की मांग की गई है। इसके अलावा उन्हें रेल बजट से यमुनानगर-जगाधरी स्टेशन को ए ग्रेड दर्जे के मुताबिक तमाम सुविधाएं मिलने सहित महत्वपूर्ण रेल लाइन प्रोजेक्ट पूरे होने की आस है। वहीं, माल के आदान-प्रदान हेतु रेल पर निर्भर कारोबारियों को माल भाड़ा कम होने समेत अन्य सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।
यात्री बोले; एयरपोर्ट की तर्ज पर हो स्टेशनों व ट्रेनों में सुविधा:
दैनिक रेल यात्री राजेश, हरीश, रवि व दीपक ने कहा कि रेल बजट में रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में एयरपोर्ट की तर्ज पर सुविधाएं मिलनी चाहिएं। सबसे अधिक जरूरत स्टेशनों व ट्रेनों में सफाई और बेहतर खाने-पीने का सामान उपलब्ध कराने की है। उन्होंने कहा कि स्थानीय यमुनानगर-जगाधरी रेलवे स्टेशन को ए ग्रेड का दर्जा हासिल है, किंतु उसके मुताबिक सुविधाएं नहीं है। स्टेशन पर सफाई, पर्याप्त शौचालय और शेड और बैठने की व्यवस्था तक नहीं है। वहीं, प्रमुख व लंबी दूरी की ट्रेनों के ठहराव न होने के कारण यात्रियों को अंबाला-सहारनपुर से ट्रेन लेनी पड़ती हैं। इसमें उनके समय और धन की अधिक बर्बादी होती है, इसलिए यात्रियों की सुविधा के मद्देनजर उक्त समस्याओं का रेल बजट में समाधान किया जाए।
लंबी वेटिंग में अतिरिक्त कोच और दिल्ली के लिए मिलें नई ट्रेनें:
दैनिक यात्री संघ के प्रधान हरप्रीत सिंह व हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के उपाध्यक्ष प्रवीन वर्मा ने कहा कि रेल बजट में इस बार किराये में कोई इजाफा न कर उसे कम किया जाए। साथ ही यात्रियों के लिए ट्रेनों और स्टेशनों पर सुरक्षा और सुविधा बढ़ानी चाहिए। लंबी वेटिंग में रिजर्वेशन कराकर यात्रियों को बिना सीट के यात्रा करनी पड़ती है, ऐसे में या तो लंबी वेटिंग रिजर्वेशन न हो अन्यथा यात्रियों के बैठने को अतिरिक्त कोच लगाया जाए। चूंकि दिल्ली के लिए स्टेशन से सिर्फ आधा दर्जन गाड़ियां हैं। जबकि जिले में व्यापारी, नौकरीपेशा, विद्यार्थी व अन्य वर्ग से जुड़े लोग काफी संख्या में दिल्ली आते-जाते हैं, इसलिए रेल बजट में दिल्ली के लिए नई ट्रेनें मिलनी चाहिए।
यात्री बोले, स्टेशन पर हों ये सब सुविधाएं:-
-स्टेशन परिसर, प्लेटफॉर्म और ट्रैक पर सफाई हो।
-स्टेशन पर शौचालयों की संख्या बढ़ें और उन्हें सुविधाओं से लैस किया जाए।
-निशक्तों के लिए पुल की सीढ़ियों के साथ रैंप बने या स्वयंचलित सीढ़ियां हों।
-टिकट काउंटर पर महिलाओं व सीनियर सिटीजन के लिए अलग लाइन हो।
-स्टेशन परिसर में रिफ्रेशमेंट हाउस का निर्माण किया जाए।
करोड़ों का राजस्व फिर भी आज तक नहीं मिला कुछ:
रेलवे को करोड़ों का राजस्व देने वाले जगाधरी के बर्तन उद्योग के लिए रेल बजट के पिटारे से आज तक कुछ नहीं निकल पाया। जबकि जगाधरी में मेटल उद्योग की सैकड़ों इकाईयां हैं, जहां बनने वाले कई टन बर्तन रेलवे से देश के विभिन्न राज्यों में भेजे जाते हैं, इसके जरिए रेलवे को मोटी कमाई होती है। किंतु कई दशकों से बर्तन निर्माताओं को रेलवे से जरूरी सुविधा भी नहीं मिल पाईं। जगाधरी रेलवे स्टेशन से लंबी दूरी की ट्रेनों में बर्तन बुक नहीं हो पाते हैं, इसके लिए पहले जगाधरी से सहारनपुर बर्तनों की बुकिंग करानी पड़ती है, फिर सहारनपुर से कमीशन एजेंट आगे की बुकिंग कराते हैं। इससे बर्तन निर्माताओं का खर्च काफी बढ़ जाता है। वहीं, जगाधरी में बर्तन बनाने के लिए आने वाले कच्चे माल को स्टेशन पर रखने के एवज में रेलवे द्वारा बर्तन निर्माताओं से प्रति घंटे के हिसाब से प्रति क्विंटल दो रुपये डैमरेज (विलंब शुल्क) वसूला जाता है। जबकि बर्तन निर्माताओं को कच्चे माल की बिल्टी तीन-चार दिन बाद मिलती है वहीं, माल स्टेशन पर पहले आ जाने से न चाहकर भी कारोबारियों को 24 घंटे के बाद प्रति क्विंटल पर प्रति घंटे की दर से रेलवे को विलंब शुल्क चुकाना पड़ता है।
माल भाड़ा न बढ़ाकर मिले लंबी दूरी की ट्रेनों का ठहराव:
दि जगाधरी मैटल मैन्यूफैक्चरर्स एंड स्पलायर्स एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी सुंदरलाल बतरा का कहना है कि रेल बजट में माल भाड़े को कम कर बर्तन निर्माताओं के लिए यमुनानगर-जगाधरी रेलवे स्टेशन पर लंबी दूरी की ट्रेनों के ठहराव की व्यवस्था करनी चाहिए। चूंकि व्यापारियों को पहले जगाधरी से सहारनपुर या अंबाला बर्तनों की बुकिंग करानी पड़ती है, फिर सहारनपुर से कमीशन एजेंट आगे की बुकिंग कराते हैं। इससे बर्तन निर्माताओं का खर्च काफी बढ़ जाता है वहीं, बाहर से आने वाले कच्चे माल को स्टेशन पर रखने के एवज में दस के बजाए 72 घंटे बाद डैमरेज लगाया जाए।
ख्वाब बनकर रह गया यमुनानगर-चंडीगढ़ रेल लाइन प्रोजेक्ट
-चार दशक पहले सर्वे हुआ, यूपीए के कार्यकाल में मिली लाइन निर्माण को मंजूरी पर नहीं बिछ पाई लाइन-
यमुनानगर-चंडीगढ़ रेल लाइन बिछने का अरमान ख्वाब बनकर ही रह गया है। इस महत्वाकांशी परियोजना पर चार दशक पहले सर्वे तो हुआ, किंतु आगे रेलवे लाइन बिछाने की दिशा में कदम नहीं बढ़ सके हैं। इस रेल लाइन के धरातल पर आने से न सिर्फ यमुनानगर बल्कि अंबाला, पंचकूला और चंडीगढ़ के लोगों को भी फायदा होगा। इस सौगात के लिए दशकों से इंतजार कर रहे युवा बुजुर्ग हो चले हैं, किंतु यमुनानगर-चंडीगढ़ रेल लाइन प्रोजेक्ट अब भी कागजों में अटका है।
यूपीए सरकार के कार्यकाल में रेल बजट में यमुनानगर वाया साढौरा चंडीगढ़ रेल लाइन के निर्माण को दोबारा हरी झंडी दी गई थी। इसके बाद एक कदम आगे बढ़ते हुए प्रदेश सरकार ने प्रोजेक्ट में गंभीरता जाहिर करते हुए यमुनानगर-चंडीगढ़ रेल लाइन के निर्माण हेतू प्रदेश सरकार के हिस्से का आधा खर्च देने की घोषणा की, बावजूद इसे अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है। इस रेल लाइन की जब से मांग की जा रही है, तब से अंबाला संसदीय सीट से कांग्रेस व भाजपा के सांसद बनते रहे हैं, फिर भी यह महत्वकांशी परियोजना अधर में है।
पौंटा, कुरुक्षेत्र रेल लाइन की मांग भी अधूरी-
यमुनानगर-चंडीगढ़ के अलावा पौंटा और कुरुक्षेत्र के लिए भी रेल लाइन बिछाने की मांग भी लंबे समय से हैं। दैनिक रेल यात्री संघ समेत विभिन्न संगठन तीनों रेल लाइन के लिए कई वर्षों से संघर्षरत हैं, किंतु आज तक इन पर काम नहीं हो पाया। अंबाला संसदीय सीट से मौजूदा सांसद रतनलाल कटारिया भी यमुनानगर-चंडीगढ़ रेल लाइन का मुद्दा संसद में उठा चुके हैं। जिलावासियों को रेल बजट में यमुनानगर-चंडीगढ़ रेल लाइन के निर्माण को शुरू करने की आस है।
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