जिले में करीब 85 हजार एकड़ में गेहूं (सोना) लगभग पककर तैयार है। छह माह खून-पसीना एक कर तैयार की गई फसल देख धरतीपुत्र काफी उत्साहित हैं। किंतु एक चिंगारी सब कुछ जलाकर खाक कर देगी। चूंकि खेतों के बीचों-बीच बिजली के ढीले तार झूल रहे हैं, शासन व प्रशासन बे-परवाह दिख रहा है। जबकि प्रतिवर्ष इसी लापरवाही में सैकड़ों एकड़ गेहूं की फसल स्वाहा हो जाती है। मौजूदा समय में कई जगह खेतों के ऊपर बिजली के तार इतने ढीले हैं कि फसल व तारों के बीच बहुत कम अंतर है। जरा-सी हवा चलने पर तारों के आपस में टकराने या फिर शॉर्ट सर्किट की स्थिति में एक चिंगारी सबकुछ स्वाह कर सकती है।
बता दें कि एक ओर जहां खेतों में खड़ी गेहूं की फसल पर बिजली के तार झूल रहे हैं। सीजन के दौरान आगजनी की घटनाओं पर काबू पाने को दमकल विभाग की गाड़ियों की संख्या भी कम है। जिले की आबादी करीब 13 लाख हो चुकी है। इस पर आग से बचाव के लिए महज ट्विनसिटी में ही दो फायर स्टेशन बने हैं। इनमें एक यमुनानगर और दूसरा जगाधरी में है। दोनों जगह फायर ब्रिगेड गाड़ियों की संख्या 15 हैं। जबकि शादीपुर में बने फायर सब स्टेशन पर अलग से एक गाड़ी खड़ी है वहीं, मार्केट कमेटी द्वारा एक-एक गाड़ी छछरौली व बिलासपुर में मुहैया कराई गई है। जिले की कुल आबादी की तुलना में गाड़ियों की संख्या के हिसाब से सवा लाख की आबादी के लिए एक गाड़ी पड़ती है। इतने बड़े क्षेत्र पर कम फायर बिग्रेड की गाडिय़ों के चलते हर वर्ष गर्मियों में किसानों का लाखों रुपये का सोना (गेहूं) आग में जलकर राख हो जाता है। इसके अलावा गाहे-बगाहे, झोपडिय़ों व अन्य स्थानों पर लगने वाली आग में भी लोगों का लाखों रुपये का नुकसान होता है। ज्यादा खराब स्थिति खिजराबाद, रादौर, साढौरा की है, जहां ब्लॉक स्तर पर दमकल गाडिय़ां नहीं है। यहां आगजनी की घटना पर साथ लगते खड़े या यमुनानगर-जगाधरी दमकल केंद्रों से दमकल गाडिय़ां बुलाई जाती हैं। ऐसे में घटनास्थल तक पहुंचने से पहले आग से काफी नुकसान हो जाता है।
तार बदलने की नहीं उठाई जहमत
किसान राकेश, गुरनाम सिंह, राम सिंह, रतनलाल व बलवंत सिंह के मुताबिक सभी ब्लॉक में दमकल की गाडिय़ों की व्यवस्था न होने से ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। अप्रैल व मई माह में सप्ताहभर में एक दिन आग लगने की घटना घटित होती है, बावजूद इसके खेतों में अब भी तैयार खड़ी गेहूं की फसल के ऊपर बिजली के जर्जर तार झूल रहे हैं। न तो ऐसी तारों की मरम्मत के लिए कदम उठाया जा रहा है और न ही तारों को बदलने की जहमत उठाई जा रही है। इसके अतिरिक्त कई स्थानों पर खेतों के आसपास जर्जर हालात खंबे भी गिरने की कागार पर हैं।
प्रत्येक ब्लॉक में हो दमकल गाड़ियों की व्यवस्था
भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रधान सुभाष गुर्जर ने कहा सभी ब्लॉक में दमकल गाड़ियों की व्यवस्था होनी चाहिए। विशेष तौर पर गेहूं के सीजन में यह और भी जरूरी हो जाता है। प्रतिवर्ष जिले में शॉट सर्किट के कारण सैकड़ों एकड़ फसल जलकर राख हो जाती है। न बिजली के तो ढीले तारों को कसने व मरम्मत का कार्य निगम द्वारा किया जा रहा है और न ही ब्लॉक स्तर पर दमकल गाड़ियों की व्यवस्था कराई जा रही है।
विभाग को किराया अदा करने से गुरेज करतीं पंचायतें
जिले की 471 ग्राम पंचायतों के अंतर्गत गांवों में यदि कहीं आग लगने की घटना होती है, तो आग पर नियंत्रण पाने के लिए दमकल केंद्र से गाड़ियां बुलाई जाती हैं। गाड़ी के दमकल केंद्र से घटनास्थल तक की दूरी तय करने व वापस लौटने तक का किराया संबंधित ग्राम पंचायत को अदा करना होता है। यह किराया 500 रुपये प्रतिघंटा वसूले जाने का प्रावधान है। गाडिय़ां जितनी दूरी तय करेंगी, उस हिसाब से पंचायत को रकम अदा करनी होती है, किंतु ऐसा देखा जा रहा है कि गाड़ियां घटनास्थल पर आग तो बुझा रही हैं, लेकिन ग्राम पंचायतें किराया अदा करने में गुरेज कर रही हैं। इस कारण दमकल विभाग का पंचायतों पर करीब पौने 3 लाख बकाया हैं, इसमें कई पंचायतों पर कई वर्षों से से राशि बकाया है। इस दिशा में विभाग की कार्रवाई महज नोटिस भेजने तक सिमट गई है।
कहां कितनी दमकल गाडिय़ां :-
यमुनानगर - 12
जगाधरी - 03
शादीपुर - 01
बिलासपुर - 01
छछरौली - 01
(इनमें बिलासपुर व छछरौली में मार्केट कमेटी व अन्य जगह दमकल विभाग की गाडिय़ां हैं।)
बिजली के तारों को कसने व मरम्मत का कार्य समय-समय पर किया जाता है। गेहूं के सीजन को देखते हुए कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं। अगर कहीं बिजली के तारे ढीले या जर्जर हालात हैं, तो किसान निगम को सूचित करें।
आरके खन्ना, एसई, बिजली निगम, यमुनानगर।
शार्ट सर्किट से डेढ़ एकड़ गेहूं हुई राख
यमुनानगर। गांव सुढैल में निर्माणाधीन नेशनल हाईवे 73 के नजदीक आग लगने से करीब डेढ़ एकड़ गेहूं की फसल जलकर राख हो गई। किसानों का कहना है कि आग खेतों के ऊपर से गुजर रहे बिजली के ढीले तारों से निकली आग की चिंगारी से लगी। दमकल विभाग को सूचना देने के बाद किसानों ने कई बार फोन किया, लेकिन फोन नहीं मिला। फोन न मिलने पर किसानों ने अपने स्तर पर आग पर काबू पा लिया। आग लगने से किसानों का हजारों रुपये का नुकसान हुआ है।
सुढैल निवासी गुरदेव सिंह व कमलजीत सिंह के खेत निर्माणाधीन नेशनल हाईवे के नजदीक है। दोनों ने अपने खेतों में गेहूं की फसल बोई हुई थी। किसानों ने बताया उनके खेतों के ऊपर से जो बिजली के तार गुजर रहे है, वे काफी ढीले होकर काफी नीचे तक लटक गए है। रविवार दोपहर करीब एक बजे बिजली आई। जैसे ही बिजली आई, उसी समय तार आपस में टकराने से आग की चिंगारी निकली। बिजली के तारों से निकली चिंगारी से गेहूं की फसल में आग लग गई। गेहूं के खेत में आग लगने की सूचना पर आसपास के लोग व किसान मौके पर पहुंच गए। किसानों ने बताया उन्होंने आग लगने की सूचना दमकल विभाग को देने के लिए आपातकालीन नंबर पर फोन मिलाया। लेकिन नंबर नहीं मिला। जिस पर किसानों ने अपने स्तर पर आग बुझाने का प्रयास किया। आग भड़कती हुई पहले गुरदेव फिर कमलजीत के खेतों में जा पहुंची। धीरे धीरे आग करीब ढेड़ एकड़ में फैल गई। किसानों ने ट्रैक्टरों व ट्यूबवेल की मदद से आग पर पाया।
शिकायतों के बाद भी नहीं ठीक किए तार
भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश सचिव हरपाल सिंह, गुरदेव व अन्य किसानों ने बताया कि क्षेत्र में बिजली के ढीले तारों की बहुत बड़ी समस्या है। इसके चलते किसान चिंतित रहता है। क्षेत्र में कई स्थानों पर ढीले तार लटके हुए है। इस को ठीक कराने के लिए कई बार बिजली निगम के एसई सहित अन्य अधिकारियों को शिकायतें दी, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। यदि बिजली निगम समय रहते इन तारों को ठीक करवा देते तो फसल में आग नहीं लगती।
गांव अलाहर व रपौली में भी एक एकड़ गेहूं जलकर राख
रादौर। गांव अलाहर व रपौली में भी खेतों के ऊपर से गुजर रहे बिजली के तारों से निकली चिंगारी से करीब एक एकड़ गेहूं की फसल जलकर राख हो गई। दोनों गांवों में आग लगने के बाद ग्रामीणों ने बड़ी मशक्कत से पानी व मिट्टी डालकर आग पर काबू पाया। इस दौरान दमकल विभाग को भी सूचना देकर मौके पर बुलाया गया, लेकिन दमकल गाडिय़ां पहुंचने से पहले ही ग्रामीणों ने आग पर काबू पा लिया। यदि ग्रामीण समय पर आग पर काबू न पाते तो गेहूं की अन्य फसल भी जलकर राख हो सकती थी।
गांव मोहड़ी निवासी नसीब सिंह ने बताया वह गांव अलाहर में खेती करते हैं। रविवार सुबह करीब नौ बजे अचानक बिजली आने पर तारें आपस में टकराई और चिंगारियां निकली। चिंगारियों से उनकी गेहूं की फसल में आग लग गई। समय रहते उन्होंने ग्रामीणों की मदद से आग पर काबू पा लिया, अन्यथा इससे दूसरी फसल भी जल सकती थी। इसी तरह गांव रपौली में सुबह अमरीक सिंह के खेतों में खड़ी गेहूं की फसल में अज्ञात कारणों से आग लग गई। आग इतनी भयंकर थी कि कुछ ही मिनटों में अमरीक सिंह की आधा एकड़ गेहूं की फसल जलकर राख हो गई।