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बस घर चलाने के लिए नगदी मिल जाये

Sat, 10 Dec 2016 12:15 AM IST
amar ujala beuro yamunanagar
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gf - फोटो : amar ujala
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वर्कशाप। नोटबंदी के 31वें दिन भी हालात सामान्य नहीं हुए है। घर के पुरुषों को काम पर जाना है और दफ्तर से हर रोज छूट्टी नहीं ले पा रहे। ऐसे में बैंक से नगदी निकालने की जिम्मेदारी के लिए महिलाएं आगे आ रही हैं। घर में बच्चों को संभालने व चुल्हा चौक के साथ समन्वय बना कर महिलाएं बैंक की लंबी कतार में लग रहीं है। यही वजह है कि बैंक के बाहर लगी कतार में महिलाओं की संख्या भी बढ़ने लगी है। कोशिश, बस इतनी है कि घर चलाने के लिए नकदी मिल जाए और किसी तरह से काम चल जाए। बैंक के बाहर लाइन में लगी महिलाओं से बात की गई, जिसमें सामने आया है कि घर के कामकाज के साथ-साथ महिलाओं पर काम का बोझ कैसे बढ़ गया है।
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बच्चों को स्कूल भेज कर आई हूं: सरिता
नवाब कालोनी निवासी सरिता का कहना है कि घर चलाने के लिए पैसों की जरुरत है। पति प्राइवेट नौकरी करते हैं, इसलिए वह दिहाड़ी तोड़ कर नहीं आ सकते। ऐसे में खुद ही आकर बैंक से नगदी निकलवाने का निर्णय लिया। सरिता ने बताया कि दस बजे बैंक में पहुंच गई थी। इससे पहले घर का नाश्ता बनाया और बच्चों को स्कूल भेज दिया। अब दोपहर के खाना बनाने तक पैसे मिलेंगे या नही पता नहीं।

बच्चों की जिम्मेदारी पड़ोसी संभालएंगे:
आदर्श नगर निवासी पूनम का कहना है कि बहन की शादी 12 दिसंबर है। उसे दस हजार रुपये की जरुरत है। दो तीन दिन पहले आई थी, तब उसका चार बजे नंबर आया था, तब तक कैश खत्म हो गया था। इसलिए उसे आज फिर आना पड़ा। पूनम कहती है कि बच्चे दोपहर तक आ जाएंगे। वह अपने पड़ोसियों को बोल कर आई है। यदि वह दोपहर तक घर नहीं गई तो बच्चों की जिम्मेदारी पड़ोसी संभालाएंगे।
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दोपहर का खाना भी बना कर आई हूं: गीता
पटेल नगर निवासी गीता का कहना है कि बच्चों की फीस देनी है और घर का राशन लेकर आना है। पैसों की बहुत जरूरत है। इसलिए बैंक के बाहर आकर लाइन में लगना पड़ा। सुबह बच्चे नाश्ता करके स्कूल चले गए थे। गीता ने बताया कि बैंक की लाइन में घंटों लग जाते हैं। इसलिए वह बच्चों के लिए दोपहर का खाना भी बना कर आई हूं। बच्चों को बोला था कि आकर खाना खुद ही खा लेना।  

बच्चे को लेने भी जाना है: सिमरन
आदर्श नगर निवासी सिमरन का कहना है कि खाते में 30 हजार रुपए जमा है और उसे आठ हजार की जरूरत है। छह दिन पहले आई थी, तब पैसे नही मिले थे। शुक्रवार को दस बजे से पहले ही पहुंच गई। सिमरन ने बताया कि साढ़े 12 बजे बेटे को स्कूल से लेना भी जाना है। तब तक नंबर आ गया तो ठीक, वरना कोई न कोई एडजस्ट करनी ही पड़ेगी।


ब्रांच मैनेजर ने बांटे टोकन
सिंडिकेट बैंक के बाहर लाइन में लगे उपभोक्ताओं को शाखा प्रबंधक ने टोकन बांटे। शाखा प्रबंधक ने कहा कि लाइन में उपभोक्ता कई बार आपस में उलझ जाते हैं। साथ ही कई लाइन तोड़ कर आगे न आए, इसके लिए उपभोक्ताओं को टोकन दिए गए हैं। इससे व्यवस्था ठीक बनी रहती है और उपभोक्ताओं को भी आसानी होती है।

निराश होकर लौटी दिव्यांग:
गांधी नगर निवासी दिव्यांग दौलत देवी ने बताया कि एसबीआई में उनका खाता है और उसे दो हजार रुपये की जरूरत है। महिला ने बताया कि सुबह दस बजे बैंक में आई थी। यहां अधिकारियों ने बताया कि आज भी कैश नहीं आया है। महिला ने बताया कि गुरुवार को भी बैंक में नकदी नही आई थी। अब बैंक में दो दिन छुट्टी रहेगी और उसे सोमवार को बुलाया गया है।  

रोडवेेज कर्मी को नहीं मिली पेंशन
नुक्कड़ निवासी आसुनलख ने बताया कि रोडवेज के यमुनानगर डिपो में इंस्पेक्टर से रिटायर्ड है। वह बीमार है और पीजीआई में इलाज चल रहा है। आठ दिन बाद पीजीआई से डिस्चार्ज होकर घर जा रहे थे। रास्ते में पेंशन के लिए रूके थे, मगर यहां आकर पता चला कि पेंशन नहीं आई है। अब उन्हें फिर से यमुनानगर आना होगा।
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