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पहाड़ोें पर बारिश से यमुना में उफान

Thu, 17 Jul 2014 12:47 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, यमुनानगर।
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पहाड़ों पर हुई बरसात से बुधवार को यमुना नदी में बाढ़ आ गई। दोपहर तीन बजे यमुना नदी का जलस्तर एक लाख 28 हजार क्यूसिक तक पहुंच गया। जिला प्रशासन ने तुरंत यमुना नदी के किनारे बसे गांवों में अलर्ट जारी कर दिया। शाम को यमुना का जलस्तर उतरने से प्रशासन ने राहत की सांस ली।
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पहाड़ों पर यमुना नदी के कैचमेंट एरिया में हुई भारी बरसात से बुधवार सुबह से ही यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने लगा। हथनीकुंड बैराज पर सुबह छह बजे जलस्तर 36888 क्यूसेक रिकार्ड किया गया। इसके बाद प्र्रत्येक घंटे जलस्तर में इजाफा होता रहा। दोपहर एक बजे तक जलस्तर 66387 क्यूसेक और तीन बजे एक लाख 28 हजार 339 क्यूसेक पहुंच गया।

यमुना नदी का जलस्तर 70 हजार क्यूसेक से अधिक होते ही हथनीकुंड बैराज से पश्चिमी यमुना नहर और उत्तर प्रदेश की पूर्वी यमुना नहर के गेट बंद कर दिए गए ताकि बाढ़ के पानी की सिल्ट से नहराें के गेट जाम ना हो जाए।
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यमुना नदी का जलस्तर बाढ़ के निशान से ऊपर पहुंचते ही जिला प्रशासन हरकत में आ गया और यमुना नदी से लगते गांवों में अलर्ट जारी कर दिया गया। जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग के अधिकारी यमुना नदी के जलस्तर पर पल-पल नजर रखते रहे। पांच बजे जलस्तर घटकर 69774 क्यूसेक रह गया, जिसके बाद बैराज से पश्चिमी और पूर्वी यमुना नहर में पानी की आपूर्ति शुरू कर दी गई। दोनों नहराें की मांग पूरी होने के बाद शेष पानी बैराज से यमुना नदी में जाता रहा।

मानसून में पहली बार यमुना में आई बाढ़
गौरतलब है कि इस मानसून में पहली बार यमुना का जलस्तर बाढ़ के निशान तक पहुंचा है। कमजोर मानसून के चलते जुलाई के दूसरे हफ्ते में भी पहाड़ों पर यमुना नदी के कैचमेंट एरिया में बरसात नहीं हुई। इस कारण हथनीकुंड बैराज से पश्चिमी और पूर्वी यमुना नहर को उनकी मांग अनुसार पानी नहीं मिल पा रहा था। बुधवार को यमुना नदी में बाढ़ आने के बाद जहां दोनों नहरों को पर्याप्त पानी मिलने लगा, वहीं यमुना नदी भी लबालब हो गई। यमुना नदी में आई बाढ़ का पानी अगले 72 घंटों तक दिल्ली पहुंचेगा।

हाइडल प्रोजेक्ट में बिजली उत्पादन बंद रहा
उधर, बैराज से नहरों में पानी आपूर्ति बंद हो जाने से हाइडल प्रोजेक्ट में भी बिजली उत्पादन पूरी तरह बंद हो गया। इस हाइडल प्रोजेक्ट की चार इकाइयों में करीब 64 मेगावाट बिजली उत्पादन होता है। यहां बिजली उत्पादन नहर के पानी पर निर्भर है। बाढ़ के चलते पश्चिमी यमुना नहर में करीब चार घंटे तक हाइडल को बिजली उत्पादन के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पाया। 
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