कमालपुर टापू गांव में यमुना का प्रकोप कम होता देख ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। यमुना नदी पर की गई पूजा-अर्चना आखिरकार काम आई। बता दें 10 दिन पूर्व जब लगातार तीन दिन बारिश हुई थी तब यमुना नदी भी उफान पर आ गई थी। जिसके चलते गांव टापू कमालपुर से साथ लगती वन विभाग की 120 एकड़ भूमि पानी के कटाव के चलते समा जाने के बाद भी भूमि कटाव नहीं रूक पाया था। यहां तक सिंचाई विभाग की तरफ से 300 से अधिक वर्करों को लगाकर कट्टों में मिट्टी भर स्टड बनाए गए जिन्हें नदी के किनारों पर लगाया गया। उसके बाद धीरे-धीरे कटाव बंद हो गया।
वीरवार को पूरा गांव किनारे पर उनकी शरण में पहुंच गया। यहां ग्रामीणों ने पंडित के माध्यम से विधि विधान से पूजा अर्चना की। हवन यज्ञ भी कराया गया तथा किनारे पर ध्वज भी लगाया गया और मान्यता के अनुसार यमुना को प्रसन्न करने के लिए गाय को भी छोड़ा गया। इसके बाद ग्रामीणों ने माफी मांग कर यमुना को अपने प्रकोप को शांत करने की प्रार्थना भी की।
हिंदू पौराणिक ग्रंथों के अनुसार यमुना नदी, यमराज की बहन है। जिसका नाम यमी भी है। यमराज और यमी के पिता सूर्य हैं। यमुना नदी का जल पहले साफ, कुछ नीला, कुछ सांवला था, इसलिए इन्हें ''काली गंगा और ''असित'' भी कहते हैं। असित एक ऋषि थे। सबसे पहले यमुना नदी को इन्होंने ही खोजा था। तभी से यमुना का एक नाम ''असित'' संबोधित किया जाने लगा।
टापू कमालपुर में भूमि कटाव अब रुक गया है। जिसके चलते स्थिति कंट्रोल में है। शुरूआती दौर में पानी का बहाव तेज होने के चलते कटाव काफी बढ़ गया था। कटाव के लिए वर्करों ने युद्धस्तर पर कार्य किया। ग्रामीणों ने भी काफी साथ दिया है। अभी वहां पर कार्य चल रहा है।
-संदीप कुमार, एक्सईएन सिंचाई विभाग।