कोरोना वायरस के चलते इस बार प्रशासन ने गणपित मूर्ति विसर्जन कार्यक्रम पर भी रोक लगा दी है। विसर्जन के दौरान होने वाली भीड़ को लेकर यह रोक लगाई गई है। वहीं इसका उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। प्रशासन के आदेश के बाद श्रद्धालु असमंजस में हैं। चूंकि प्रशासन का यह आदेश गणेश चतुर्थी के दिन मूर्ति स्थापना के बाद जारी किया गया है। आदेशों से पूर्व लोग घरों में भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित कर चुके हैं। अब पाबंदी लगने से श्रद्धालु परेशान हैं कि वे विसर्जन किस प्रकार करें। चूंकि धार्मिक मान्यता अनुसार चतुर्दशी के दिन भगवान गणेश को विदा करना होता है। दस दिन से ज्यादा मूर्ति घर व अन्य पूजन स्थान पर नहीं रखी जा सकती है। विसर्जन की रोक के साथ ही ऐसा करने पर कानूनी कार्रवाई का भी सामना करना पड़ेगा। यह आदेश श्रद्धालुओं के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है।
मॉडल कॉलोनी निवासी महेंद्र पाराशर ने बताया कि उन्होंने चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की मूर्ति घर पर स्थापित की थी। चूंकि उस समय प्रशासन व सरकार की ओर से सामूहिक कार्यक्रम पर पाबंदी थी। लेकिन घरों में मूर्ति स्थापना और विसर्जन न करने के आदेश नहीं थे। लेकिन अब स्थापना के बाद वे मूर्ति विसर्जित किस प्रकार करेंगे।
ग्रीन पार्क कॉलोनी में जगदीश दत्ता ने बताया कि उन्होंने भी घर पर मूर्ति स्थापना की है। स्थापना के बाद विसर्जन पर रोक लगाना सही नहीं है। जो श्रद्धालु स्थापना कर चुके हैं वे मूर्ति विसर्जित कैसे करें। यह आदेश पहले दिए जाने चाहिए थे।
विसर्जन में दी जाए छूट
शहरवासी रितिक, दीपक, रमन, किशोर, मोहित, शोभित, रामप्रकाश, राजकुमार, यश, सुनीता, रमा, प्रभा, सुरभि, वैभवी ने कहा कि उनकी धार्मिक आस्था पर रोक लगाना उचित नहीं है। प्रशासन को घाट पर विसर्जन के लिए विशेष प्रबंध करने चाहिए। वहीं इसके लिए विशेष नियम बनाकर इसमें छूट देनी चाहिए।