संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। घर की जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली महिलाएं अब स्वरोजगार परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही हैं। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं पशुपालन को आय का जरिया बनाकर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं।
कई महिलाएं छोटे स्तर से पशुपालन शुरू करने के बाद धीरे-धीरे पशुओं की संख्या बढ़ा रही हैं और दूध उत्पादन से अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। गांव चौराही की महिंद्रों देवी ने बताया कि परिवार की आय बढ़ाने के लिए उन्होंने शुरुआत में कुछ छोटे पशु लेकर पशुपालन का काम शुरू किया था। धीरे-धीरे पशुओं की संख्या बढ़ाती गईं।
अब दूध उत्पादन के माध्यम से अच्छी आय अर्जित हो रही है। पशुओं के लिए हरा चारा खेतों से और जरूरत के अनुसार बाजार से खरीदा जा रहा है। उनका कहना है कि पशुपालन ने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में काफी मदद की है।
गांव कैत की सपना ने बताया कि महिलाओं के लिए पशुपालन ऐसा स्वरोजगार है, जिसे घर की जिम्मेदारियों के साथ भी आसानी से किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि दूध बेचकर होने वाली आमदनी से घर के खर्च में सहयोग मिलता है। उनका कहना है कि यदि परिवार का सहयोग मिले तो महिलाएं पशुपालन को बड़े स्तर पर ले जाकर अपनी आमदनी बढ़ा सकती हैं।
महिलाओं ने बताया कि पहले पशुपालन केवल घरेलू जरूरत तक सीमित था। अब दूध बेचकर नियमित आमदनी हो रही है।
पशुओं की देखभाल के साथ चारे की व्यवस्था पर ध्यान देकर उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। घर बैठे आय होने से वे परिवार की जरूरतों को पूरा करने में सहयोग कर पा रही हैं। महिलाओं को पशुपालन, डेयरी और अन्य स्वरोजगार गतिविधियों के लिए प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता मिले तो वे इसे और बेहतर तरीके से कर सकती हैं, जिससे उनकी आमदनी में और इजाफा होगा।
परिवार को मिल रहा आर्थिक सहारा
महिलाओं के परिवारों का कहना है कि पहले घर के खर्च की जिम्मेदारी मुख्य रूप से पुरुषों पर रहती थी। अब महिलाओं की ओर से दूध उत्पादन और अन्य स्वरोजगार गतिविधियों से होने वाली आय से परिवार को आर्थिक सहारा मिल रहा है। परिवार के सदस्यों के अनुसार महिलाओं की मेहनत से न केवल आमदनी बढ़ी है, बल्कि उनमें आत्मविश्वास भी बढ़ा है। उन्होंने कहा कि परिवार की तरक्की में महिलाओं की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।
गांव चौराही में अपने पशुओं के साथ महिंद्रो देवी। स्वयं