यमुनानगर। जिले में महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एचएसआरएलएम) प्रभावी रूप से काम कर रहा है। प्रशिक्षण लेकर महिलाएं आत्मनिर्भर बनने की राह पर चल पड़ी हैं।
मिशन के माध्यम से अब तक 46 हजार से अधिक महिलाएं पंजीकरण करवा चुकी हैं और विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। जिला कार्यक्रम प्रबंधक दविंद्र शर्मा ने बताया कि जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुशील कुमार के नेतृत्व में मिशन की योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू किया जा रहा है।
गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत मिशन ने प्रदेशभर में पांच लाख महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का संकल्प लिया है, ताकि महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें और परिवार की आय में महत्वपूर्ण योगदान दे सकें। मिशन के तहत जिले में अब तक 25,412 महिलाओं को विभिन्न व्यवसायों का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
प्रशिक्षण के बाद महिलाएं स्वरोजगार अपनाकर अपनी आय में वृद्धि कर रही हैं। गांवों में महिलाएं दुकान संचालन, ब्यूटी पार्लर, खेती-बाड़ी, सॉफ्ट टॉय निर्माण और अन्य छोटे उद्यमों से जुड़कर अपनी अलग पहचान बना रही हैं। आंकड़ों के अनुसार 20,681 महिलाएं पशुपालन से जुड़ी हैं, जबकि 2,804 महिलाएं नॉन-फार्मिंग गतिविधियों में कार्यरत हैं।
इसके अलावा 15,563 महिलाएं अन्य आयवर्धक कार्यों से जुड़ी हुई हैं। मिशन के सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं। जिले की 105 महिलाओं की वार्षिक आय दो से तीन लाख रुपये तक पहुंच चुकी है। वहीं 8,579 महिलाएं एक से दो लाख रुपये तक सालाना कमा रही हैं।
इसके अलावा 7,630 महिलाएं प्रशिक्षण प्राप्त कर 60 हजार से एक लाख रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं। मिशन के प्रयासों से न केवल महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है, बल्कि उनमें आत्मविश्वास भी बढ़ा है। अब वे परिवार और समाज में निर्णय लेने में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्र में सामाजिक बदलाव की नई तस्वीर उभर रही है। संवाद