संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिले के छोटे से गांव मिश्री का माजरा की महिलाओं ने मेहनत, एकजुटता और आत्मविश्वास के बल पर आत्मनिर्भर बन रही हैं। वर्ष 2016 में गांव की 10 महिलाओं ने मिलकर आर्थिक रूप से सशक्त बनने का संकल्प लिया था। आज उनका यह प्रयास न केवल उनके परिवारों की आय बढ़ा रहा है, बल्कि गांव के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
प्रधान सोना देवी के नेतृत्व में महिलाओं ने विभिन्न क्षेत्रों में काम शुरू किया। समूह की महिलाओं ने अपनी बचत को एकत्रित कर गांव में आटा चक्की स्थापित की। पहले ग्रामीणों को अनाज पिसवाने के लिए दूसरे गांवों का रुख करना पड़ता था, लेकिन अब यह सुविधा गांव में ही उपलब्ध है। इससे ग्रामीणों का समय और खर्च दोनों बच रहे हैं, वहीं महिलाओं को अतिरिक्त आमदनी भी हो रही है।
सोना देवी गांव के मोड़ पर चाय-समोसे की दुकान संचालित कर रही हैं, जो उनकी आय का प्रमुख स्रोत बन चुकी है। वहीं उषा रानी, अनीता और गुरमिंद्र सहित अन्य महिलाएं पशुपालन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। दूध उत्पादन और कृषि कार्यों के माध्यम से वे अपने परिवारों की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं।
महिलाओं ने खेती के साथ-साथ स्वरोजगार के अन्य साधनों को भी अपनाया है। महिला समूह की सदस्य नियमित बैठकों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेकर अपने कार्यों को और बेहतर बनाने का प्रयास कर रही हैं। उनका मानना है कि यदि महिलाएं संगठित होकर कार्य करें और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएं, तो वे समाज में अपनी अलग पहचान बना सकती हैं। प्रधान सोना देवी ने बताया कि समूह की महिलाओं ने कभी हार नहीं मानी और हर चुनौती का सामना मिलकर किया। आज उनके प्रयासों से गांव की कई महिलाएं आत्मनिर्भर बनी हैं और दूसरों के लिए प्रेरणा स्रोत बन रही हैं।