यमुनानगर। जिस उम्र में अधिकांश लोग आराम को प्राथमिकता देते हैं, उस उम्र में मॉडल टाउन निवासी 89 वर्षीय बूटाराम मेहरा आज भी प्रतिदिन साइकिल चलाकर स्वस्थ जीवन का संदेश दे रहे हैं। साइकिलिंग के प्रति उनका जुनून ऐसा है कि उन्होंने न केवल देशभर की प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया, बल्कि साइकिल पर 14 देशों का भ्रमण कर यमुनानगर और देश का नाम भी रोशन किया।
बूटाराम मेहरा ने वर्ष 1960 में साइकिल चलाना शुरू किया था। शुरुआती दिनों से ही उनका झुकाव खेल और साहसिक अभियानों की ओर रहा। उन्होंने पंजाब, राजस्थान, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, बिहार, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में आयोजित साइकिल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। टाटानगर में आयोजित 25 किलोमीटर की रेस में प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि मध्य प्रदेश में 100 किलोमीटर की प्रतियोगिता में दूसरा स्थान हासिल किया।
वर्ष 1976 में उन्होंने दिल्ली के रणजीत सिंह, बेंगलुरु के टी. पुरुषोत्तम और बीनू रानी के साथ विश्व यात्रा का साहसिक अभियान शुरू किया। उस समय बीनू रानी को साइकिल पर विश्व भ्रमण करने वाली पहली भारतीय महिला माना गया। चार सदस्यीय यह दल दिल्ली से रवाना हुआ और जयपुर, अजमेर, उदयपुर तथा अहमदाबाद होते हुए मुंबई पहुंचा। वहां से जहाज के जरिए कुवैत गया और फिर साइकिल पर अपनी अंतरराष्ट्रीय यात्रा शुरू की।
इस यात्रा के दौरान बूटा राम ने कुवैत, इराक, ईरान, तुर्की, बुल्गारिया, युगोस्लाविया, हंगरी, चेकोस्लोवाकिया, ऑस्ट्रिया, जर्मनी, फ्रांस, बेल्जियम और इंग्लैंड सहित 14 देशों का भ्रमण किया। यात्रा का उद्देश्य केवल साहसिक अभियान नहीं था, बल्कि विभिन्न देशों की संस्कृति, समाज और जीवनशैली को करीब से समझना भी था।
उस दौर में सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने यह कठिन अभियान पूरा किया। बूटाराम बताते हैं कि जब उन्होंने यात्रा शुरू की थी, तब परिवार ने केवल 500 रुपये खर्च के लिए दिए थे। मजबूत इरादों और आत्मविश्वास ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। वह साइकिल फेडरेशन ऑफ इंडिया के सदस्य भी रह चुके हैं। उन्होंने अपने जीवन में लाखों किलोमीटर का सफर साइकिल पर तय किया है। संवाद
रोजाना सुबह और शाम चलाते हैं साइकिल
वर्ष 1962 में भारतीय औद्योगिक वित्त निगम, नई दिल्ली में नौकरी शुरू करने वाले बूटा राम वर्ष 1996 में सेवानिवृत्त हुए। इसके बाद वह यमुनानगर में आकर बस गए। सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने साइकिल से दूरी नहीं बनाई। आज भी वह प्रतिदिन सुबह और शाम 10 से 15 किलोमीटर साइकिल चलाते हैं। उनका मानना है कि साइकिल सबसे सस्ता, पर्यावरण अनुकूल और स्वास्थ्यवर्धक वाहन है। नियमित साइकिल चलाने से शरीर के सभी अंगों का व्यायाम होता है और व्यक्ति लंबे समय तक स्वस्थ रह सकता है। बूटा राम मेहरा का कहना है कि उम्र केवल एक संख्या है। यदि मन में जुनून, अनुशासन और कुछ कर गुजरने की इच्छा हो तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता। अपने अनुभवों और जीवनशैली के माध्यम से वह आज भी युवाओं को फिट रहने, खेलों से जुड़ने और पर्यावरण संरक्षण के लिए साइकिल अपनाने की प्रेरणा दे रहे हैं।
मॉडल टाउन में साइकिल चलाते बूटाराम। स्वयं- फोटो : 1