संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। महिलाएं अब घर की जिम्मेदारियों तक सीमित रहने के बजाय स्वरोजगार ओर कदम बढ़ाकर अपनी अलग पहचान बना रही हैं। जिले के गांवों में कई महिलाएं छोटे स्तर से काम शुरू कर उसे धीरे-धीरे आगे बढ़ा रही हैं।
किसी ने मशरूम उत्पादन को रोजगार बनाया तो किसी ने पशुपालन और दूध उत्पादन से पहचान बनाई। वहीं कुछ महिलाओं ने गांव में ही छोटे व्यवसाय शुरू कर ग्रामीणों को सुविधाएं उपलब्ध कराने का काम किया है। गांव महमूदपुर की नीलम ने प्रशिक्षण लिया और मशरूम उत्पादन को बड़े स्तर पर आगे बढ़ाया।
आज नीलम एक मशरूम उत्पादक के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। उनका का कहना है कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए घर से निकलकर प्रशिक्षण लेना चाहिए। मेहनत से छोटे व्यवसाय को भी बड़े में बदला जा सकता है। गांव कैत की सर्वरी ने पशुपालन का काम शुरू किया। शुरुआत में उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ा।
लेकिन परिवार के सहयोग और अपने जज्बे के दम पर उन्होंने काम जारी रखा। धीरे-धीरे उनका काम बढ़ता गया और आज गांव के साथ आसपास के क्षेत्र में भी सर्वरी की पहचान दूध उत्पादक के रूप में बनी है। उनका कहना है कि महिलाओं को किसी भी काम की शुरुआत करने से घबराना नहीं चाहिए। मिश्री का माजरा गांव की सोना देवी ने आटा चक्की लगाकर स्वरोजगार की राह चुनी।
पहले गांव और आसपास के लोगों को गेहूं पिसवाने के लिए कई किलोमीटर दूर शहर जाना पड़ता था। गांव में आटा चक्की शुरू होने के बाद ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर ही सुविधा मिलने लगी। उन्होंने बताया कि उनका मुख्य उद्देश्य स्वरोजगार के साथ गांव और आसपास के लोगों को सुविधा देना भी है।
गांव महमूदपुर में घर में उगाई मशरूम के साथ मौजूद नीलम। स्वयं- फोटो : 1
गांव महमूदपुर में घर में उगाई मशरूम के साथ मौजूद नीलम। स्वयं- फोटो : 1