यमुनानगर। साढौरा क्षेत्र के कनीपला गांव में स्वयं सहायता समूहों के जरिये महिलाओं की जिंदगी में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। इस बदलाव की अगुआ बनी हैं रेखा देवी, जिन्होंने न केवल खुद आत्मनिर्भरता की राह पकड़ी, बल्कि अन्य महिलाओं को भी इस दिशा में आगे बढ़ाया है।
वर्ष 2019 में लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद रेखा देवी ने अपने जीवन की नई शुरुआत की। समूह में कुल 10 महिलाएं शामिल हैं, जिनमें प्रधान सुषमा, सचिव किरण, खजांची रजनेश के साथ रेखा देवी और अन्य सदस्य मिलकर बचत व स्वरोजगार के कार्य कर रही हैं। समूह के माध्यम से छोटी बचत ने महिलाओं को आर्थिक मजबूती दी है और आज वे अपने पैरों पर खड़ी हैं।
रेखा देवी ने डेयरी व्यवसाय को आय का मुख्य साधन बनाया है। उनके पास चार भैंस और चार गाय हैं, जिनसे प्रतिदिन करीब एक क्विंटल दूध उत्पादन हो रहा है। इस दूध की बिक्री से न केवल उनकी आय बढ़ी है, बल्कि समूह की अन्य महिलाओं को भी आर्थिक लाभ मिल रहा है। पशुओं के चारे के लिए उन्होंने बरसीन, हरा चारा, भूसा और चोकर की व्यवस्था की है।
साथ ही 40 हजार रुपये में खेत ठेके पर लेकर चारे की समस्या का स्थायी समाधान भी किया है। रेखा देवी की भूमिका केवल अपने व्यवसाय तक सीमित नहीं है। वे नारी शक्ति महिला ग्राम संगठन की प्रधान हैं और 19 स्वयं सहायता समूहों की विलेज फैसिलेटर के रूप में कार्य कर रही हैं। इन समूहों से करीब 190 महिलाएं जुड़ी हुई हैं, जिन्हें वे प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभा रही हैं। संवाद
प्रशिक्षण व बैंक लोन से मिल रहा सहारा
हरियाणा राज्य आजीविका मिशन के तहत महिलाओं को समय-समय पर प्रशिक्षण और बैंक लोन की सुविधा दी जा रही है, जिससे वे अपने छोटे-छोटे व्यवसाय शुरू कर रही हैं। इससे उनकी आमदनी बढ़ रही है और परिवार की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आ रहा है। जिला कार्यक्रम प्रबंधक दविंद्र शर्मा के अनुसार, मिशन का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। कनीपला गांव इसका सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है, जहां समूह की ताकत ने महिलाओं को नई पहचान दिलाई है।