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Yamuna Nagar News: डॉक्टर की गिरफ्तारी पर अड़े महिला के परिजन

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राज अस्पताल में पित्त की थैली में पत्थरी के ऑपरेशन के दौरान हुई गंदापुरा निवासी कुसुम की मौत के मामले में परिजन डॉक्टर पर कार्रवाई की मांग को लेकर अड़े रहे। शुक्रवार दोपहर बाद तीन बजे तक परिजन राज अस्पताल के बाहर डटे रहे। उनकी मांग थी कि जब तक आरोपी डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उसे गिरफ्तार नहीं किया जाता, वे अस्पताल के बाहर से नहीं हटेंगे।
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इस दौरान परिजनों ने डॉक्टर के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जमकर हंगामा किया। उन्होंने महिला का शव लेने से मना कर दिया। डीएसपी कंवलजीत सिंह व शहर थाना प्रभारी पृथ्वी सिंह ने उन्हें समझाया कि पहले महिला का पोस्टमार्टम कराए। पोस्टमार्टम में महिला की मौत का कारण पता चलने पर डाॅक्टर की लापरवाही सामने आएगी। उसी के बाद उस पर कार्रवाई की जाएगी। जिसके बाद परिवार पोस्टमार्टम को राजी हुए।
पोस्टमार्टम कार्रवाई के दौरान भी परिजन अस्पताल के बाहर बैठकर नारेबाजी करते रहे। तीन डॉक्टरों के पैनल ने महिला के शव का पोस्टमार्टम किया। शाम करीब साढ़े चार बजे पोस्टमार्टम के बाद परिजनों ने महिला के शव को लिया और संस्कार के लिए राजी हुए। इस दौरान राज अस्पताल की ओपीडी बंद रही। सैकड़ों की संख्या में यहां ग्रामीणों की भीड़ लगी रही।
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गंदापुरा निवासी कृष्ण सिंह ने बताया कि उसकी पत्नी 40 वर्षीय कुसुम के पेट में काफी दिनों से दर्द था। वह दो अक्तूबर को चेकअप कराने के लिए भाई कन्हैया चौक स्थित राज अस्पताल में आए थे। जहां डॉक्टर राजकुमार ने राज अस्पताल से ही उसका अल्ट्रासाउंड कराया। जिसमें उसके पत्नी के पित्त की थैली में 18 एमएम की पत्थरी बताई गई। तब डॉक्टर ने उन्हें पांच अक्तूबर का ऑपरेशन का समय दिया था।
वीरवार वह सुबह 11 बजे डॉक्टर ने उसकी पत्नी को अस्पताल में भर्ती किया। इसके बाद तीन बजे उसकी पत्नी को ऑपरेशन के लिए थियेटर में ले जाया गया। करीब तीन घंटे तक ऑपरेशन करने के बाद छह बजे डॉक्टर ऑपरेशन थियेटर से बाहर आया और कहा कि ऑपरेशन ठीक हो गया है। लेकिन उन्हें उसकी पत्नी से मिलने नहीं दिया गया। साढ़े छह बजे तक डॉक्टर व स्टाफ उन्हें गुमराह करते रहे। बाद में डॉक्टर ने बताया कि उसकी पत्नी कुसुम की ऑपरेशन के दौरान मौत हो गई है। कृष्ण सिंह व अन्य परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर ने उसकी पत्नी के उपचार में लापरवाही बरती है। जिससे उसकी मौत हुई है। सुबह से डॉक्टर ने उन्हें धोखे में रखा। डॉक्टर व स्टाफ ने उन्हें कुछ नहीं बताया। जब उसकी पत्नी की मौत हो गई, तभी उन्हें सूचित किया गया। आरोप है कि कुसुम की मौत डॉक्टर की लापरवाही से हुई है। डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की जाए।




राज अस्पताल के मुख्य डॉक्टर राजकुमार का कहना है कि ऑपरेशन के दौरान जब वह पित्त की थैली को जब निकाल रहे थे तो ब्लीडिंग होनी शुरू हो गई। ब्लीडिंग को रोकने की काफी कोशिश की और एक डाक्टर को और बुलाया। बाद में ब्लीडिंग रोक पाए। इसके बाद मरीज को 10 यूनिट ब्लड चढ़ाया गया। लेकिन इसके बाद भी हम उसे नहीं बचा पाए। किसी तरह की लापरवाही नहीं की गई। उन पर लगाए आरोप गलत व बेबुनियाद है। वह हर जांच के लिए तैयार है।



शहर थाना प्रभारी पृथ्वी सिंह का कहना है कि महिला की मौत के मामले में हंगामा कर रहे परिजनों को समझाकर शांत कर दिया है। महिला के शव का पोस्टमार्टम करवा दिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर मौत के वास्तविक कारणों का पता चलेगा। उसके बाद ही मामले में आगामी कार्रवाई की जाएगी।
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