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प्रदेशभर में एक साथ की जाएगी वन्य प्राणियों की गणना, परियोजना पर खर्च किए जाएंगे 39 लाख रुपये

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Wildlife will be counted simultaneously in the state, Rs 39 lakh will be spent on the project - फोटो : Yamuna Nagar
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यमुनानगर। प्रदेश के जंगलों में पहली बार एक साथ वन्यजीव जंतुओं की जनगणना का काम शुरू किया जाएगा। वाइल्ड लाइफ विभाग की तरफ से इस परियोजना पर 39 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। परियोजना के लिए मार्च 2019 में बजट प्रस्तावित किया गया था और जुलाई 2019 में वित्तीय स्वीकृति के बावजूद धन की कमी के कारण जनगणना नहीं की जा सकी थी। अब तक प्रदेश के वन्य जीव विभाग की तरफ से 20 लाख रुपये की धनराशि भारतीय वन्यजीव संस्थान यानी डब्ल्यूआईआई देहरादून को भेजी जा चुकी है। वहीं डब्ल्यूआईआई ने सर्वेक्षण के लिए एक प्रमुख परियोजना सहयोगी और चार परियोजना सहयोगियों को चुनने की प्रक्रिया को अंतिम रूप दे दिया है।
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इस परियोजना के तहत पंचकूला, कुरुक्षेत्र, झज्जर, सिरसा और रेवाड़ी में वन्यजीव अभ्यारण गुरुग्राम में सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान और यमुनानगर में कलेसर राष्ट्रीय उद्यान को शामिल किया गया है। इसमें संरक्षित वन क्षेत्रों के अलावा इनसे सटे जिलों, खुले खेतों और बफर जोन में भी वन्यजीवों की उपस्थिति जानने के लिए सर्वेक्षण किया जाएगा। संरक्षित क्षेत्रों में जहां सीसीटीवी और अन्य अत्याधुनिक निगरानी प्रणालियों का उपयोग किया जाएगा। वहीं बाहरी क्षेत्रों के लिए जानवरों के पंजों के निशान देखकर और सामान्य अनुमान लगाया जाएगा। सर्वेक्षण टीम राज्य में पक्षियों की जैव विविधता की भी जांच करेगी। यह सर्वेक्षण एक साल तक चलेगा।
वाइल्ड लाइफ में हरियाणा की स्थिति
-राज्य में दो राष्ट्रीय उद्यान गुड़गांव के पास सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान, यमुनानगर में कलेसर राष्ट्रीय उद्यान हैं। वहीं आठ वन्यजीव अभ्यारण्यों में मोरनी में बीर शिकारा, पंचकूला में पिंजरोर, यमुनानगर में कलेसर, कुरुक्षेत्र में छिलछिला, रेवाड़ी में नाहर, सिरसा में अबुबशहर और जिला झज्जर में भिंडावास व खापड़वास अभ्यारण हैं। वहीं पांच प्रजनन केंद्र, तीन मिनी चिड़ियाघर और एक हिरण पार्क भी हैं।
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जिला जीव जंतु विभाग के निरीक्षक सुनील तंवर का कहना है कि इस जनगणना का मुख्य उद्देश्य शाकाहारी और मांसाहारी जानवरों की आबादी के बारे में जानना है। इस परियोजना पर 39 लाख रुपये की राशि खर्च की जाएगी। वैज्ञानिक कार्यप्रणाली देहरादून स्थित भारतीय वन्य जीव संस्थान के विशेषज्ञ करेंगे और हमारे कर्मचारी क्षेत्र भ्रमण के दौरान मौजूद रहेंगे। यह सर्वेक्षण बंदरों की आबादी को बढ़ाने की रणनीति तैयार करने में भी मदद करेगा। यह पहली बार है जब राज्य भर में जनगणना एक साथ की जा रही है।
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