फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कलेसर पार्क में तेंदुओं का बढ़ा कुनबा, उत्तराखंड से आए हाथी और अन्य जीवों से बढ़ी पार्क की रौनक

विज्ञापन
kalesar national park - फोटो : Yamuna Nagar
विज्ञापन
यमुनानगर। कलेसर स्थित प्रदेश के नेशनल पार्क में उत्तराखंड के राजाजी नेशनल पार्क से पहुंचे हाथियों से रौनक हो गई है। पिछले एक साल से हाथियों के झुंड कभी नेशनल हाईवे तो कभी खेतों और यमुना के किनारे चहलकदमी करते नजर आते हैं। वाइल्ड लाइफ विभाग के रिकॉर्ड में पांच साल पहले जहां चार हाथी दर्ज है। वहीं अब इनकी संख्या 10 से ज्यादा हो गई है। वहीं तेंदुओं का कुनबा भी बढ़ गया है। साल 2017 में हुई गिनती में तेंदुओं की संख्या 31 थी, जबकि अब इनकी संख्या 50 से ज्यादा मानी जा रही है। वन जीवों के संरक्षण के मद्देनजर वाइल्ड लाइफ विभाग अब मई-जून में वन्यप्राणियों की गिनती का काम शुरू किया जाएगा।
विज्ञापन

इस दौरान विशेष रूप से तेंदुए, हिरण, नीलगाय, बंदर, मोर, हाथी, जंगली बिलाव जैसे जीवों पर विशेष फोकस किया जाएगा, क्योंकि हरियाणा में ये जीव ही अधिकतर संख्या में पाए जाते हैं। इन वन जीवों की गणना के पश्चात केंद्र और राज्य सरकार की ओर से इनके संरक्षण के लिए और अधिक प्रभावी कार्यक्रम तैयार किए जाएंगे। वन्य जीवों की गिनती के काम में देहरादून स्थित भारतीय वन्य जीव संस्थान के विशेषज्ञों से मदद ली जाएगी। इसके लिए वाइल्ड लाइफ विभाग की ओर से वन्य प्राणियों की गिनती की पूरी रूपरेखा तैयार करके देहरादून की वन्य प्राणी संस्थान को भेजा गया है। इस संस्थान को केंद्र सरकार द्वारा वन्य प्राणी गणना के लिए नोडल एजेंसी बनाया गया है। गिनती शुरू करने से पूर्व विभाग के सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। गिनती के लिए जंगल में कई जगह सीसीटीवी लगाए जाएंगे और जीवन जंतुओं के पैरों के निशान लिए जाएंगे।
2017 में हुआ था सर्वे
वन विभाग ने अपने स्तर पर साल 2012 में सर्वे किया था। जिसमें कर्मचारियों ने पैदल चल कर पंजों के निशान से जीवों की संख्या का अध्ययन किया था। ये अध्ययन पुरानी पद्धति पर आधारित था, जिसमें जानवरों की संख्या की स्पष्ट रूप से पहचान नहीं हो पाती है। उस समय कलेसर में 8 से 10 तेंदुए होने की बात सामने आई थी। इसके पांच साल बाद 2017 में वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट को नेशनल पार्क में जीवों की सही स्थिति का पता लगाने का काम सौंपा गया। जिसमें इंस्टीट्यूट की टीमों ने यमुनानगर और पावंटा साहिब से सटे जंगल और पहाड़ियों में सर्वे किया। इस दौरान करीब 12 कैमरे भी लगाए गए थे। इसकी रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि कलेसर में तेंदुओं की संख्या 31 है। वहीं 30 जगहों पर 150 नीलगाय, 50 जगहों पर 80 मोर भी पाए गए थे। हालांकि उस समय हाथियों की संख्या का खुलासा नहीं किया जा सका था। अब एक बार फिर से जीवों की संख्या का सही पता करने के लिए तैयारी पूरी कर ली गई है।
विज्ञापन

कलेसर नेशनल पार्क एक नजर
-शिवालिक पहाड़ियों में वन्य प्राणी विहार 13422 एकड़ में फैला हुआ है।
- इसे 13 दिसंबर, 1996 को अधिसूचित किया गया था।
-उत्तराखंड के राजाजी नेशनल पार्क और हिमाचल प्रदेश के सिपलवाड़ा नेशनल पार्क की सीमाओं से सटा है।
-एक तरफ यमुना नदी बह रही है। जिससे जीवजंतुओं के लिए पेयजल उपलब्ध है।
-नेशनल पार्क 8 नवंबर 2015 से सार्वजनिक यात्रा के लिए खुला है।
-पार्किंग, विश्राम कक्ष, पेयजल जैसी सार्वजनिक सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।
-वन विभाग की ओर से दो सफारी गाड़ियों की व्यवस्था की हुई है।
-यह गाड़ी 16 किलोमीटर की यात्रा करवाती है।
-यहां तेंदुए, सांबर, चीतल, नीलगाय, भालू, बिल्ली, जंगली धब्बेदार बिल्ली, हाथी, लंगूर, बंदर, जंगली मुर्गे जैसे जानवरों की प्रजातियां देखने को मिलती हैं।
-यह मानचित्र पर उत्तरी अक्षांश में 300 18 से 300 27 के बीच तथा पूर्वी देशांतर में 770 25 से 770 35 पर स्थित है।
- जैव विविधता के मामले में यह कई औषधीय पौधों का भंडार है।
इस बार कलेसर नेशनल पार्क जीव जंतुओं से गुलजार है। बड़ी संख्या में हाथी चहलकदमी करते हुए दिखाई देते हैं। तेंदुओं की संख्या में भी दोगुना तक वृद्धि होने की उम्मीद है। साल 2017 की सर्वे रिपोर्ट के बाद सबसे ज्यादा तेंदुए, हिरण और जंगली बिलाव की संख्या में इजाफा हुआ है। इस बार सर्वे पुरानी और नई दोनों पद्धति से किया जाएगा। जून-जुलाई में वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की टीम काम शुरू कर देगी।वन विभाग ने भी सैलानियों के लिए कलेसर जंगल खोल दिया है। नेशनल पार्क में जंगल सफारी का रोमांचकारी सफर का आनंद लिया जा सकता है। यहां प्राकृतिक का रोमांच देखने को मिलता है।
विज्ञापन

-सुनील तंवर, जिला वन्य प्राणी निरीक्षक
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें