संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापनगर। कलेसर नेशनल पार्क में वन्यजीवों के बेहतर पोषण और प्राकृतिक आवास को अनुकूल बनाने के लिए वन एवं वन्यजीव विभाग ने पहल की है। पार्क की फायर लाइन में जवी, सरसों, गेहूं और जौ की बुवाई की गई है। इसका उद्देश्य सर्दियों में शाकाहारी वन्यजीवों को पार्क के भीतर ही पौष्टिक हरा चारा उपलब्ध करवाना है।
फायर लाइन में तैयार ग्रासलैंड वन्यजीवों की भोजन संबंधी जरूरतों को पूरा करने में सहायक होगा। बरसात के बाद हैरोइंग करवाने से मिट्टी मुलायम और भुरभुरी हो गई है। ऐसे में वन्यजीव यहां चारा खाने के साथ खुली मिट्टी और रेत में लोटते तथा अठखेलियां करते भी नजर आ रहे हैं। खुले स्थान उन्हें स्वाभाविक गतिविधियों के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराते हैं।
वन्यजीव निरीक्षक लीलू राम ने बताया कि वन्यजीवों का संरक्षण, उनका स्वास्थ्य और प्राकृतिक आवास का रखरखाव विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल है। फायर लाइन में उगाई जा रही जवी, सरसों, गेहूं और जौ की फसलें सर्दियों में हरा चारा उपलब्ध कराने में मदद करेंगी। यह व्यवस्था फरवरी के अंत तक जारी रहेगी। इसके बाद फरवरी के अंतिम सप्ताह में दोबारा हैरोइंग करवाकर फायर लाइन की सफाई और क्लीयरेंस सुनिश्चित की जाएगी। इससे गर्मियों में जंगल में आग लगने की आशंका कम करने करने में मदद मिलेगी।
बाघ से लेकर हाथी तक का बसेरा
कलेसर नेशनल पार्क विभिन्न वन्यजीव प्रजातियों के लिए महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवास है। यहां बाघ, तेंदुआ, हाथी, सांभर, चीतल, काकड़, घोरल, सेही, जंगली बिल्ली, जंगली सूअर, बिज्जू, सियार और खरगोश सहित कई वन्यजीव पाए जाते हैं। इसके अलावा अजगर, किंग कोबरा, कोबरा, रसेल वाइपर, कॉमन करैत, रैट स्नेक, रेड सैंड बोआ और मॉनिटर लिजार्ड जैसे सरीसृप भी यहां मौजूद हैं। ग्रासलैंड तैयार करने की पहल से वन्यजीवों को सर्दियों में भोजन उपलब्ध कराने और उनके प्राकृतिक व्यवहार को बढ़ावा देने में मदद मिलने की उम्मीद है।