संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। एक माह पहले रादौर के खेड़ी लक्खा सिंह सुबह आठ बजे ही गोलियों की तडतड़ाहट से गूंज उठा था। शूटरों ने 80 राउंड से अधिक फायर कर तीन कारोबारियों को मौत के घाट उतार दिया था। पुलिस ने शूटरों की मदद करने के आरोप में नौ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। पुलिस के सामने अभी भी यही सवाल खड़ा है कि आखिर वारदात को अंजाम देने वाले शूटर कौन थे।
बीती 26 दिसंबर को सुबह सवा आठ बजे रादौर क्षेत्र के खेड़ी लक्खा सिंह चौकी से चंद कदमों की दूरी पर हुई गैंगवार में बदमाशों ने तीन युवकों पंकज मलिक, विरेंद्र और अर्जुन की हत्या कर दी थी। वारदात को अंजाम देने के बाद शूटर मौके से फरार हो गए थे। इस वारदात को जिस तरीके से अंजाम दिया गया था उससे पूरे हरियाणा में इसकी गूंज सुनाई दी थी।
वारदात का खुलासा करने के लिए पुलिस अलग-अलग टीमों का गठन किया गया था। साथ ही अंबाला और करनाल एसटीएफ की टीमों को भी वारदात को खुलासा करने के लिए लगाया गया था। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पहले की दिन शूटरों को कार उपलब्ध कराने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था।
इसके बाद पुलिस को लगा था कि इसे कड़ी बनाकर वारदात का खुलासा हो सकेगा। इसके बाद एक के बाद एक कई नाम सामने आए। पुलिस ने नौ आरोपियों को शूटरों की मदद करने के आरोप में जेल भेजती रही। 90 से अधिक लोगों से पूछताछ की गई। लेकिन, असल में वारदात को अंजाम देने वाले शूटरों तक पुलिस एक माह बाद भी नहीं पहुंच पाई।