संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। शहर में हो रहे विकास कार्य लगातार सवालों के घेरे में आ रहे हैं। ऐसे ही एसके (सहारनपुर-कुरुक्षेत्र) रोड पर नालों के निर्माण पर प्रश्नचिह्न लग रहा है। इस रोड के शहर में लगते दो हिस्सों जोड़ियों से विश्वकर्मा चौक व शुगर मिल से डब्ल्यूजेसी (पश्चिमी यमुना नहर) तक नई सड़कें बन चुकी है, तब जाकर नगर निगम दोनों हिस्सों में नाले बनाने जा रहा है।
हालांकि वार्ड से निवर्तमान पार्षद व लोग मानसून में जलभराव और नालों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मशीनों से नई सड़कों के नुकसान की आशंका में सड़क से पहले नाले बनाने की मांग कर रहे थे। आरोप है कि निगम अफसरों ने नालों के निर्माण के लिए तमाम औपचारिकताएं पूरी करने से लेकर टेंडर करने में देरी कर दी।
दोनों हिस्सों में नई सड़कें बन गई तो नालों के निर्माण का 2.11 करोड़ रुपये के अनुमान पर ई-टेंडर लगा है, उसमें भी कार्य पूरा करने की अवधि आठ माह 15 दिन दी गई है। यानी किसी सूरत में नालों का निर्माण आगामी मानसून सीजन से पहले संभव नहीं, जिससे गत वर्षों की तरह जलभराव के साथ नई सड़कों के नुकसान हो सकता है।
एसके (सहारनपुर-कुरुक्षेत्र) रोड पर जोड़ियों से विश्वकर्मा चौक तक 7.43 करोड़ रुपये के अनुमान पर पीडब्ल्यूडी की ओर से सीसी (सीमेंट कंकरीट) सड़क के निर्माण कार्य का नौ अगस्त 2023 को विधायक घनश्याम दाम अरोड़ा व निवर्तमान मेयर मदन चौहान ने कार्य का उद्घाटन किया था। तब बताया गया था कि सड़क के साथ यहां 2.50 करोड़ रुपये के अनुमान पर पब्लिक हेल्थ सीवर लाइन और 4.78 करोड़ रुपये के अनुमान पर नगर निगम रोड के दोनों नालों का निर्माण करेगा।
उद्घाटन के बाद से पब्लिक हेल्थ सीवर लाइन व पीडब्ल्यूडी रोड बनाने में लगे रहे, जिनका काम पूरा हो चुका है। लेकिन नगर निगम ने रोड के दोनों ओर नालों का निर्माण कार्य नहीं किया। ऐसे ही शुगर मिल से लेकर डब्ल्यूजेसी (पश्चिमी यमुना नहर) तक तारकोल की परत बिछाई जा चुकी है।
वहीं अब नगर निगम की ओर से विश्वकर्मा चौक व शुगर मिल से डब्ल्यूजेसी (पश्चिमी यमुना नहर) तक नालों के निर्माण के लिए 2.11 करोड़ के अनुमान पर ई-टेंडर लगाया गया है। जबकि नालों का काम निवर्तमान पार्षद व लोग सड़कों के निर्माण से पहले किए जाने की मांग कर रहे थे।
पहले बनने चाहिए थे नाले : निर्मल चौहान
वार्ड 13 से निवर्तमान पार्षद निर्मल चौहान ने कहा कि सड़क बनाने से पहले नाले बनने चाहिए थे, ऐसी ही मांग निगम अफसरों से की थी। लेकिन ऐसा नहीं किया गया। सीसी सड़क बनाने के उद्घाटन से लेकर अभी तक निगम अफसरों ने टेंडर की औपचारिकताएं पूरी नहीं की। अब ईटेंडर लगाया है, उसमें भी कार्य पूरा करने की अवधि आठ माह 15 दिन है। यानी मानसून से पहले यह काम पूरा होना संभव नहीं। ऐसे में जिसका डर था वही होगा। मानसून की बारिश में यहां पानी निकासी का प्रबंध न होने से गत वर्षों जैसे जलभराव के हालात हो सकते हैं। इसके साथ ही नालों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मशीनों से भी नई तैयार सड़कों को नुकसान की आशंका है।
संबंधित अफसर को नालों का निर्माण कार्य समय रहते शुरू व पूरा कराने के निर्देश देंगे। जिससे रोड पर पानी निकासी की व्यवस्था हो सके।- आयुष सिन्हा, आयुक्त, नगर निगम।