यमुनानगर। जिले के साथ लगती उत्तराखंड के पहाड़ों पर जमी बर्फ न पिघलने से हरियाणा-उत्तर प्रदेश की सीमा पर बना हथिनी कुंड बैराज पर पानी की कमी हो गई है।
इससे मैदानी इलाकों में कृषि और अन्य जरूरतों के लिए पानी का संकट गहराने लगा है, वहीं पानी की आपूर्ति पूरी न होने पर पनबिजली परियोजनाएं प्रभावित होने लगी है। इतना ही नहीं जलस्तर घटने से हरियाणा को मिलने वाला नौ हजार क्यूसेक पानी भी पूरा नहीं हो पा रहा है। बैराज पर पानी की कमी का असर हरियाणा सहित उत्तर प्रदेश, दिल्ली पर भी पड़ेगा। चूंकि, दिल्ली व उत्तरप्रदेश के लिए पानी भी हथिनी कुंड बैराज से छोड़ा जाता है।
जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह 10 बजे तक कुल 2710 क्यूसेक बैराज का जलस्तर था, जोकि दोपहर दो बजे तक घटकर 2673 क्यूसेक तक रह गया है। इस तरह से डब्ल्यूजेसी (पश्चिमी यमुना नहर) में 2025 क्यूसेक और ईजेसी (पूर्वी यमुना नहर) में 296 क्यूसेक पानी था। विदित हो कि हथिनी कुंड बैराज की 995900 क्यूसेक पानी की क्षमता है, जबकि नहर की क्षमता 25 हजार क्यूसेक है। वहीं ईजेसी से उत्तर प्रदेश को पानी दिया जाता है। ईजेसी की क्षमता 7545 क्यूसेक की है।
ताजेवाला स्थित पन बिजली परियोजना के लिए प्रतिदिन 5400 क्यूसेक पानी की जरूरत है, परंतु अभी इतना पानी तो बैराज पर भी नहीं है।
कथा में उपस्थित श्रद्धालु कथा का आनंद लेते हुए। संवाद